आपदा में लापता हुए लोगों को हरहाल में मृत घोषित करना होगा। बगैर मृतक घोषित किए मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना संभव नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अड़ंगे के चलते अब प्रदेश सरकार सभी लापता को मृतक का प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था बनाने में जुटी हुई है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अड़ंगा लगा दिया
कानूनी पेच से बचने को शुरुआती दिनों में प्रदेश सरकार ने लापता को मृत मानते हुए परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा कर दी। लेकिन उसकी नियमावली को केंद्र से हरी झंडी अब तक नहीं मिल सकी। बताया गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पर अड़ंगा लगा दिया है। उसने लापता के मृत्यु प्रमाण पत्र की व्यवस्था के बारे में जानकारी मांगी है। आपदा प्रबंधन विभाग ने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि
मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की जिम्मेदारी दूसरे महकमे की है। मामला मुख्य सचिव से होकर स्वास्थ्य महकमे तक पहुंच गया। अब स्वास्थ्य विभाग लापता को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था बनाने में जुटा है।
मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण एक्ट के तहत है। एक्ट में लापता को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है। लिहाजा पहले लापता को मृतक घोषित करना राज्य सरकार की मजबूरी बन गई है। प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे को सुनामी वाली व्यवस्था ही अपने यहां लागू करने को कहा गया है। अगली कैबिनेट बैठक में इस व्यवस्था पर मुहर लग सकती है।
सरल से सरल प्रक्रिया बनाने पर जोर
मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की सरल से सरल प्रक्रिया तय करने की वकालत की जा रही है। जिससे अपने परिजन को खो चुके लोगों की न भावनाएं आहत हों और न ही लोगों को प्रमाण पत्र पाने के लिए भटकना पड़े। बताया गया कि राज्य सरकार बाहरी राज्यों के लोगों के लिए दिल्ली में एक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का काउंटर खोलेगी। सभी राज्यों के स्थानिक आयुक्तों के माध्यम से लोग आवेदन कर प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे।
आनलाइन व्यवस्था भी बनाई जाएगी। राज्य के 921 लापता लोगों के प्रमाण पत्र उनके गांवों में ही सक्षम अधिकारी को भेज कर वेरीफिकेशन करवाने और हाथों हाथ प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था बनाई जा रही है।
खबर पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें