वन विभाग के जलवायु परिवर्तन प्रकोष्ठ के मुताबिक उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने यह अध्ययन किया है। बाकी राज्यों की ओर से भी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसमें अभी अध्ययन जारी है और नए तथ्यों का समावेश भी इस अध्ययन में किया जा रहा है।
कंपोजिट वल्नेरेबिलिटी को हम समग्र रूप से उस क्षेत्र के समुदायों की तकलीफ के रूप में भी देख सकते हैं। टेड़ी पुलिया से हरिद्वार की ओर जाते हुए आपको कई ऐसे गांव मिल जाएंगे जो हाथियों के कारण परेशान हैं। वहां के लोग रात को सो तक नहीं पाते। ठीक इसी तरह हमने सामाजिक, आर्थिक, आपदा आदि के आधार पर यह अध्ययन किया कि प्रदेश में कौन से जिले मौसम बदलाव के कारण किस आधार पर तकलीफ उठाएंगे। रिपोर्ट से जाहिर है कि हरिद्वार में लोगाें को इन तकलीफों का मुकाबला करने के लिए अधिक तैयार करना होगा। मतलब की इनकी एडेप्टिव कैपेबिलिटी का विकास करना होगा।
- आरएन झा, अपर प्रमुख वन संरक्षक, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन
कौन सा जिला किस श्रेणी में
अत्यधिक संवेदनशील - टिहरी और चंपावत
अति संवदेनशील - हरिद्वार, अल्मोड़ा, बागेश्वर
मध्यम - उत्तरकाशी, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर और रुद्रप्रयाग
कम - पिथौरागढ़, चमोली
बहुत कम - देहरादून, नैनीताल