देहरादून। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के 20वें प्रदेेश अधिवेशन की शुरुआत शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल को श्रद्धांजलि के साथ हुई। इस मौके पर उनकी याद में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
राजपुर स्थित जीआरडी इंस्टीट्यूट में शनिवार को प्रांत अधिवेशन में पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड को मार गिराने वाली सैन्य टुकड़ी को लीड करने वाले शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल छाए रहे। शहीदों की याद में भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि एबीवीपी वर्ष 1952 से कॉलेजों में 180 दिन उपस्थिति की मांग कर रही थी, जिसे उनकी सरकार ने पूरा कर दिया। जल्द ही फोन के इस्तेमाल पर छात्रों से राय ली जाएगी। उन्होंने कहा कि कॉलेजों के हालात में आने वाले समय में और सुधार किए जाएंगे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक के प्रांत प्रचारक युद्धवीर ने प्रदर्शनी को अपने जीवन में आत्मसात करने की बात कही और पलायन का मंत्र देते हुए कहा कि शिक्षा स्वरोजगार परक होनी चाहिए ताकि रोजगार पहाड़ों में उपलब्ध हो सके। श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डॉ. पीपी ध्यानी ने कहा कि एबीवीपी का काम नकारात्मक सोच को राष्ट्र निर्माण के लिए सकारात्मक सोच में बदलना है। उत्तराखंड तकनीकी विवि के कुलपति डॉ. नरेंद्र एस चौधरी ने एबीवीपी को शिक्षा में भारतीयता लाने के लिए काम करने का सुझाव दिया। एसजीआरआर यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. यूएस रावत ने शुभकामनाएं दीं। प्रदर्शनी में राज्य और देश से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। मेयर सुनील उनियाल गामा ने अध्यक्षता करते हुए युवाओं को नशा मुक्त रहने का संदेश दिया। एबीवीपी की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ममता सिंह ने कहा कि यह प्रदर्शनी चार दिन चलेगी। इस मौके पर एबीवीपी के क्षेत्रीय संगठन मंत्री मनोज नीखरा, प्रांत संगठन मंत्री प्रदीप शेखावत, स्वागत समिति सदस्य सिद्धार्थ अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कौशल कुमार, प्रदेश मंत्री रोहित ओझा, व्यवस्था प्रमुख संकेत नौटियाल, डॉ. विजय बहुगुणा, अश्वनी पांडे, मनीषा राणा, तान्या वालिया भी मौजूद रहे।