लोकायुक्त बिल पर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि अगर यह 'गीता के ग्रंथ' की तरह है तो मोदी, धूमल और शिवराज चौहान समेत भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसे क्यों नहीं लागू किया।
संशोधन के बाद ही लागू
सीएम ने कहा कि तत्कालीन भाजपा सरकार ने जो ड्राफ्ट राष्ट्रपति की मंजूरी को भेजा, उसमें कई खामियां हैं। लोकायुक्त बिल को संशोधन के बाद ही लागू किया जाएगा। यह राज्य का विशेषाधिकार है। इसमें राष्ट्रपति के अपमान जैसी कोई बात ही नहीं है। भाजपा इस पर ओछी राजनीति कर रही है।
संविधान में 118 बार संसोधन
मुख्यमंत्री ने सोमवार को पुलिस लाइन में पुलिस स्मृति दिवस पर आयोजित परेड की सलामी लेने के बाद पत्रकारों के सवालों के जवाब में यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान में 118 बार संसोधन हो चुका है। इसका आशय यह नहीं लगाना चाहिए कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का अपमान हो रहा है।
सस्ती लोकप्रियता के लिए किया
कांग्रेस हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ रही है। कांग्रेस पूरे देश में एक ऐसा कानून चाहती है जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके। तत्कालीन भाजपा सरकार ने जो ड्राफ्ट भेजा उसे 2012 के चुनाव में जनता ने नकार भी दिया है।
कार्यक्रम में मौजूद कृषि मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि भाजपा सरकार ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए आनन-फानन में कई खामियों के साथ इसे राष्ट्रपति की मंजूरी को भेज दिया।
जब सदन के पटल पर इसे लाया गया था तब भी नेता प्रतिपक्ष के रूप में मैंने खुद इसका विरोध किया था। इसमें सबसे बड़ी कमी यह है कि जांच भी और फैसला देने का अधिकार भी लोकायुक्त को ही दिया गया है। ऐसा किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं है। कांग्रेस पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून बना रही है।
बयान पर गोलमोल जवाब
विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के लोकायुक्त बिल को लागू करने संबंधी सवाल को जहां मुख्यमंत्री टाल गए वहीं कृषि मंत्री ने भी इस पर गोलमोल जवाब दिया। कृषि मंत्री ने कहा कि कई बार पार्टी नेताओं द्वारा जानकारी न होने की वजह से कोई बात कह दी जाती है। इसे लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष के बयान पर उन्होंने कि इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।