उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने विपक्ष के साथ हुई बैठक में किए दोनों वायदे तोड़ दिए।
निशंक ने कहा सीएम ने खनन को निजी हाथों में नहीं देंने और दैवी आपदा में नुकसान और राहत कार्यों का एक विवरण जारी करने का कमिटमेंट किया था। लेकिन सरकार मुकर गई।
राज्य में माफियाराज कायम
पूर्व सीएम निशंक ने कहा कि खनन को निजी हाथों में देकर राज्य के लोगों के हितों की अनदेखी की गई। राज्य में माफियाराज कायम करने के लिए यह कदम उठाया गया। दैवी आपदा पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की थीं, सरकार ने वायदा किया था कि श्वेतपत्र तो नहीं बल्कि एक संपूर्ण विवरण जारी होगा। लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ।
सरकार पूरी तरह अपाहिज
राज्य सरकार ने आपदा प्रभावितों के लिए कुछ करने के बजाय करोड़ों रुपए की धनराशि सरकार के प्रचार प्रसार के लिए विज्ञापनों में फूंक डाली। और, ये सारे विज्ञापन सरकारी थे। यह सरकार पूरी तरह से अपाहिज हो चुकी है। पंचायतों को सरकारी बाबुओं के हवाले कर दिया गया। सालाना बजट का कुल पंद्रह प्रतिशत छह महीनों में खर्च हुआ।
सिडकुल भूमि घोटाले को सरकार ने दबा दिया। मुख्य सचिव कह रहे है कि ईपीआईएल नाम की कंपनी यहां काम नहीं कर रही, जबकि सारा राज्य जानता है उसे बगैर टेंडर के अरबों रुपए का काम दिया है। ये सरकार अपने ही विधायकों का विश्वास खो चुकी है, कांग्रेसी विधायक मुख्यमंत्री को कभी रजिया कहते हैं तो कभी द्रौपदी की संज्ञा देते हैं। इसलिए इस सरकार को तत्काल इस्तीफा देकर जनता से माफी मांगनी चाहिए।