उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बदलने की चर्चाओं का असर विजय बहुगुणा के चेहरे तौर पर नजर आया। गांधी स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दोपहर में उनके चेहरे पर साफ तौर पर तनाव नजर आ रहा था।
अचानक जोश और उत्साह में दिखे
मंच से किसी प्रकार की घोषणा करने से बचते रहे, लेकिन शाम को ट्रांसपोर्ट नगर में 33 केवी सब स्टेशन के उद्घाटन अवसर पर अचानक वह पूरे जोश और उत्साह में दिखे। नियोजन मंत्री दिनेश अग्रवाल को दो अतिरिक्त मांगे जोड़कर देने पर भी उसे पूरा कराने की घोषणा की।
गांधी स्कूल में एक भवन सहित कुछ अन्य सरकारी योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करने के लिए मुख्यमंत्री गांधी स्कूल पहुंचे हुए थे। भवन का उद्घाटन से ठीक पहले विधायक के समर्थक बहुगुणा जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। इस पर मुख्यमंत्री चिढ़ गए। उन्होंने नारे न लगाने के लिए इशारा किया।
मोबाइल बजता रहा
इसके बाद वह मंच पर बैठे। इस दौरान भी सहज नहीं दिखते। आधे घंटे के दौरान कई बार उनका मोबाइल बजता रहा। क्षेत्रीय विधायक राजकुमार, एक पूर्व पार्षद और कांग्रेसी नेता ने मंच से मुख्यमंत्री से कुछ घोषणाएं कराने की कोशिश की, लेकिन आपदा का हवाला देकर मुख्यमंत्री ने किसी प्रकार की घोषणा करने से मना कर दिया।
मंच से उतरने के बाद मीडिया से बातचीत करने से बचते नजर आए। केवल योजनाओं पर ही बात की। नेतृत्व परिवर्तन के सवाल को टाल गए। ढाई घंटे बाद शाम साढ़े चार बजे ट्रांसपोर्ट नगर में 33 केवी बिजली सब स्टेशन के उद्घाटन के मौके पर बहुगुणा के चेहरे का हाव भाव बदला हुआ था।
घोषणा करने का अनुरोध
कार्यकर्ताओं से लेकर नियोजन मंत्री और अधिकारियों तक से मुस्कुराते नजर आए। नियोजन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने जब उनसे कुछ मांगों को लेकर घोषणा करने का अनुरोध किया। तब मुख्यमंत्री ने कहा कि नियोजन मंत्री की जितनी भी मांगे है, उसमें दो और मांगे जोड़ दी जाए।
उसे भी पूरी करने की घोषणा की। साथ ही कहा कि लो या लाई वोल्टेज ठीक नहीं है। वह राजनीति में हो या फिर ऊर्जा में। 240 वोल्ट पर ऊर्जा सप्लाई होते रहना चाहिए। इसके भी राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे है।
बीच कार्यक्रम से साकेत लौटे
गांधी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे साकेत बहुगुणा में पहुंचे हुए थे, लेकिन सोमवार को उनके भी चेहरे का हाव भाव बदला हुआ था। कांग्रेसी कार्यकर्ता उनके पास जाने से बचते नजर आए।
केवल दो कांग्रेसियों के साथ वह अकेले खड़े नजर आए। मंच पर वह नजर नहीं आए। मौके की नजाकत को देखते हुए बीच कार्यक्रम से ही उठकर चले गए।