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उत्तराखंड: यहां सिस्टम के फेर में फंसी हैं हजारों उत्तरा, जानिए इस 'दलदल' की सच्चाई

Sun, 01 Jul 2018 09:34 AM IST
अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून
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उत्तरा पंत बहुगुणा
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दुर्गम में करीब 25 वर्ष तक सेवा। तीन साल पहले पति का निधन, 55 वर्ष से अधिक की आयु। इसके बावजूद सरकार का सिस्टम मानने को तैयार नहीं है कि उत्तरा पंत बहुगुणा का तबादला कर दिया जाए। ऐसा केवल उत्तरा के साथ नहीं है। सच तो यह है कि प्रदेश में ऐसी हजारों उत्तरा हैं, जो सिस्टम के फेर में फंसी हुई हैं। इनके लिए दुर्गम से सुगम में तबादला किसी युद्ध को जीतने से कम नहीं है।

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अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से ही ट्रांसफर-पोस्टिंग उद्योग यहां जमकर फला-फूला है। तबादलों की कोई स्पष्ट नीति न होने के कारण रसूखदारों और नेताओं व अफसरों के चहेतों को तो मनमाने तबादले का लाभ मिलता रहा लेकिन आम कर्मचारी टस से मस नहीं हो पाया। पहली बार मे.ज. भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) की सरकार के दौरान तबादला एक्ट बनाने की कवायद शुरू हुई। इसमें तबादलों के स्पष्ट नियम और उन्हें कड़ाई से लागू करने के प्रावधान किए गए। 2012 में कांग्रेस की सरकार ने आते ही एक्ट को दरकिनार कर फिर नीति के आधार पर तबादले शुरू कर दिए। 

2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद एक बार फिर राज्य में तबादला एक्ट की कवायद शुरू हुई। इसमें पात्र शिक्षकों को अनुरोध के आधार पर तबादलों का प्रावधान भी किया गया। इसमें दुर्गम की सेवा पूरी कर चुके, बीमार, दिव्यांग, विधवा को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की गई। इसके बावजूद उत्तरा जैसे कई कर्मचारी हैं, जो आज भी तबादला होने की बाट जोह रहे हैं। 

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अतिदुर्गम श्रेणी के 32 अंक होने के बावजूद उन्हें तबादले का लाभ नहीं मिला

Teacher
एफ श्रेणी के राजकीय इंटर कॉलेज चौंडी, चमोली में भौतिक विज्ञान प्रवक्ता के पद पर तैनात भुवनेश्वर प्रसाद पंत पिछले 12 वर्षों से शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम दे रहे हैं। इस दौरान उन्होंने प्रवक्ता रसायन विज्ञान और प्रभारी प्रधानाचार्य के रूप में अतिरिक्त सेवाएं भी दी। 2009 के तबादला एक्ट में पंत का नाम प्रदेशभर की सूची में पहले स्थान पर होने के बावजूद कुछ नहीं हुआ। 2016-17 की सूची में भी पंत का नाम प्रदेशभर की सूची में पहले स्थान पर आया लेकिन फिर भी उनका तबादला नहीं हुआ। अतिदुर्गम श्रेणी के 32 अंक होने के बावजूद उन्हें तबादले का लाभ नहीं मिला। जबकि इसी दौरान उन्हें दो बार हार्ट अटैक भी हो चुका है। 

जीआईसी कर्णप्रयाग में तैनात राजनीति विज्ञान के प्रवक्ता वासुदेव डिमरी पिछले काफी समय से किडनी की समस्या से पीड़ित हैं। पिछले करीब डेढ़ साल से उनका नियमित डायलिसिस चल रहा है। पहाड़ में कहीं भी डायलिसिस की सुविधा न होने के कारण वह तबादले की मांग कर रहे हैं। हालांकि अभी तक उनके प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 

तबादलों पर हम नियमों से बंधे हुए हैं। प्रदेश में तबादला एक्ट लागू है और इसके अनुसार ही कर्मियों के तबादले किए जाएंगे। हर पात्र कर्मचारी को तबादले का लाभ मिल सके इसके लिए ही हमारी सरकार ने तबादला एक्ट लागू किया है। इसके प्रावधानों और सरकार के नियमों के अनुसार जो भी तबादले का पात्र होगा, उसे लाभ दिया जाएगा। 
- त्रिवेंद्र रावत, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
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