ई-डिस्ट्रिक्ट योजना करीब सात साल से उत्तराखंड के एक जिले पौड़ी में पायलट स्तर पर चल रही थी। अब जाकर यह पूरे प्रदेश में शुरू हुई है।
मुख्यमंत्री ने माजरा स्थित एक जनसेवा केंद्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि सरकार ने एक नई पहल की है। इससे लोगों को ऑनलाइन आवेदन करने के बाद उनके घर के निकट खुले केंद्र से ही जरूरी प्रमाणपत्र मिल जाएंगे।
बताया कि पीपीपी मोड पर देवभूमि जनसेवा केंद्र दूरदराज के क्षेत्रों में शुरू किए जा रहे हैं। देवभूमि जनसेवा केंद्र पर आवेदन करने वाले लाभार्थियों को मुख्यमंत्री ने प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल, सचिव सूचना प्रौद्योगिकी दीपक गैरोला मौजूद रहे।
छह गांवों पर खुलेगा एक केंद्र
योजना की शुरूआत प्रत्येक ब्लॉक पर कम से कम एक जनसेवा केंद्र स्थापित करने से की गई है। अभी लगभग तीन हजार ऐसे केंद्र खोले जाने हैं, जिसके लिए ग्रामीण क्षेत्र में मानक हैं कि प्रत्येक छह गांवों पर एक केंद्र और शहरी क्षेत्र में प्रत्येक वार्ड में एक केंद्र खोला जाना है।
पहले खर्च नहीं किया, अब पैसे को तरसे
राज्य में लगभग सात-आठ वर्ष से ई-गवर्नेंस के सभी कार्यक्रम ठंडे बस्ते में पड़े रहे। अधिकारियों की उपेक्षा झेलते रहे आईटी विभाग को कई बार केंद्र की धनराशि ब्याज सहित सरेंडर करनी पड़ी।
लंबे अंतराल के बाद ई गवर्नेंस पर सचिव स्तर पर कामकाज शुरू हुआ तो केंद्र ने अगले वित्तीय वर्ष में फंडिंग की व्यवस्था समाप्त कर दी है। बीते सात साल में बरती गई लापरवाही के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के बजाए प्रदेश सरकार केंद्र पर अनदेखी का आरोप लगा रही है।