सियासी संकट की भेंट चढ़े उत्तराखंड सरकार के बजट को जारी करने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक बार फिर महामहिम को चिट्ठी लिखकर खजाने पर लगे ताले को खोलने का अनुरोध किया है।
बजट रुके होने के चलते राज्य में विकास संबंधी छोटी-बड़ी तमाम योजनाओं के अटकने का तर्क मुख्यमंतत्री ने पत्र में दिया है। उन्होंने यह आशंका भी जताई है कि यही स्थिति रही तो यह वर्ष विकास शून्य हो सकता है।
बीती 11 मार्च को राज्य की वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने लगभग 40 हजार करोड़ का बजट प्रस्तुत किया था। चुनावी वर्ष को ध्यान में रखते हुए हर तबके के लिए तमाम घोषणाएं बजट में की गई थीं। मगर बजट पर मत विभाजन के दौरान हुई बगावत के चलते सरकार अल्पमत में आ गई और राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
इस सबके बीच बजट पर भी रोक लगा दी गई। उसके बाद फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करके हरीश रावत सरकार में वापस तो आ गए लेकिन सरकारी खजाने का ताला नहीं खुल सका। इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को महामहिम राष्ट्रपति को एक पत्र लिखकर बजट पर लगी रोक समाप्त करने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार सुरेंद्र कुमार ने कहा कि स्पीकर ने बजट पास कर दिया था। वहीं हाईकोर्ट ने भी यह कहा था कि स्पीकर मास्टर ऑफ द हाउस होता है। इस लिहाज से बजट को रोके जाने का कोई संवैधानिक कारण नहीं बनता है। राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया है कि इसे जल्द से जल्द जारी किया जाए, जिससे उत्तराखंड का विकास सुनिश्चित किया जा सके।