मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी फ्लीट से वाहनों की संख्या कम करने के साथ ही आधे सुरक्षा कर्मी भी कम कर दिए।
अभी तक सीएम फ्लीट में पायलट कार के अलावा छह एम्बेसेडर कार शामिल होती थीं लेकिन अब सीएम ने अपने लिए इनोवा का चयन किया है।
सीएम फ्लीट में अब एक पायलट जिप्सी के अलावा दो इनोवा ही रहेगी। आदेश पर अमल भी हो गया है।
हर मुख्यमंत्री के लिए जेड सिक्योरिटी
केंद्रीय गृह मंत्रालय व राज्य सरकार की तरफ से हर मुख्यमंत्री के लिए जैड प्लस सिक्योरिटी का प्रावधान है। लेकिन नए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आधी व्यवस्था वापस कर दी है।
फिलहाल उन्होंने एम्बेसेडर के बजाय इनोवा गाड़ी से चलना शुरू कर दिया है। अब सीएम के काफिले में पायलट कार के अलावा दो इनोवा है।
ऐसे होगी अब फ्लीट
एक इनोवा में मुख्यमंत्री रहते हैं और दूसरी में चार सुरक्षाकर्मी। पूरी फ्लीट में ही अब पायलट कार समेत तीन वाहन है।
सीएम ने मंगलवार को डीजीपी बीएस सिद्धू, डीजी विजिलेंस एसके भगत और इंटेलीजेंस व सुरक्षा केपुलिस अफसरों को बुलाया और कमांडों हटाने को कहा।
मौजूदा सीएम की सुरक्षा व्यवस्था
एक पायलट कार, इसके पीछे मुख्यमंत्री का वाहन (इनोवा) और इसके पीछे के वाहन (इनोवा) में सवार सिविल वर्दी में चार सुरक्षाकर्मी।
अभी तक ये व्यवस्था थी
सीएम की सुरक्षा में अभी तक एक पायलट कार, उसकेपीछे एक कमांडो कार, फिर मुख्यमंत्री का वाहन, उसके पीछे सिविल वर्दी में सुरक्षाकर्मियों का वाहन और सबसे अंत में एक वाहन स्पेयर में होता था।
काफिले में बढ़े इनके वाहन
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भले ही अपनी फ्लीट में वाहनों की संख्या कम कर दी हो लेकिन उनके काफिले में प्राईवेट वाहनों की संख्या बढ़ गई है।
जब सीएम सचिवालय से कूच करते है तो मुख्यमंत्री के लिए नियत गेट से ही नेताओं की गाड़िया भी आ जा रही है। इसे लेकर सुरक्षाकर्मी भी हलकान है।
दुर्घटना की आशंका
जब काफिला चलता है तो कुछ कांग्रेसी नेताओं के वाहन उनके पीछे-पीछे रहते हैं। सचिवालय में आने जाने के लिए मुख्यमंत्री के लिए अलग से गेट है।
दूसरे नेताओं के वाहन भी फ्लीट में शामिल होकर उसी गेट से निकल रहे हैं। इससे सीएम की सुरक्षा के साथ ही दुर्घटना की आशंका भी बनी है क्योंकि नेताओं की ये गाड़ियां भी फ्लीट के साथ रफ्तार से दौड़ती हैं।