अकलियत (अल्पसंख्यक समुदाय) की कांफ्रेंस में उत्तराखंड वजीर-ए-आला (मुख्यमंत्री) हरीश रावत उर्दू तहजीब में उनसे रू-ब-रू हुए।
संबोधन की शुरुआत अकलियत के लोगों से सलाम कर की, उलमाओ का सम्मान किया। आधा घंटे का अपना पूरा भाषण सीएम ने उर्दू तहजीब पर केंद्रित रखा, जो मुस्लिम समाज को खूब भाया। तालियों से मुख्यमंत्री के प्रयास की सराहना की।
सचिवालय में किसी मीटिंग में व्यस्त होने के कारण मुख्यमंत्री कार्यक्रम में तीन घंटे बाद पहुंचे। सुबह दस बजे से वजीर-ए-आला की बाट जोह रहे लोगों के चेहरे सीएम को देखते ही खिल उठे। उनके जोश को देख मुख्यमंत्री ने टाउन हाल में मौजूद लोगों को सलाम किया, कहा कि उनकी मुहब्बत का इंतजार लंबा हो गया।
वक्त की नजाकत को देख उन्होंने अकलियत की जुबान में ही अपना भाषण शुरू कर दिया। हर वर्ग को साथ न लेकर चलना अपने आप और मुल्क को धोखा देना बताया। हिंदी को हिंदू से और उर्दु को मुस्लिम से न जोड़ने की वकालत की।
आखिर में उन्होंने अपने नेताओं को उर्दू के अल्फाज सीखने की सीख दी। कहा कि उर्दू अल्फाज से भाषण की शान बढ़ जाती है। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री अपनी उर्दू-हिंदी मिश्रित जुबान से लोगों का दिल जीतने में कामयाब रहे।
हयात, दिलशाद की ताजपोशी की तैयारी
अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की कांफ्रेंस के आयोजक पुराने कांग्रेसी हयात खान और दिलशाद खान थे। कांफ्रेंस में आम वक्ता से लेकर शहर काजी तक ने दोनों की कार्यशैली की तारीफ की। वहीं खुद मुख्यमंत्री भी उनको कोई न कोई पद देकर ताजपोशी करने का इशारा कर गए।
धर्म आधारित आंकड़ों पर भाजपा को घेरा
धर्म आधारित आंकड़े पर मुख्यमंत्री हरीश रावत उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया और कहा कि बिहार चुनाव से पहले यह आंकड़े जारी करके भाजपा दोनों समुदायों में लकीर खींचकर चुनावी फायदा उठाना चाहती है।
वहीं उन्होंने बगैर किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग मुल्क की फिजा बिगाड़ना चाहते हैं। कहा कि ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।