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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को थमाया 'अनाड़ी' ड्राइवर

Wed, 07 Jan 2015 03:20 PM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के वाहन की स्टेयरिंग हल्द्वानी दौरे में अनाड़ी वाहन चालक को थमा दी गई। इसके अलावा साथ चल रहा पुलिस बल अनुशासनहीन था जिसने बिना अफसरों के आदेश के ही पत्रकारों पर लाठियां भांजकर घायल कर दिया।
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पूरे घटनाक्रम में अभिसूचना तंत्र भी नाकारा साबित हुआ। ये सभी तथ्य घटना के जांच अधिकारी व वरिष्ठ आईएएस शैलेश बगोली की जांच रिपोर्ट में सामने आए हैं। यह रिपोर्ट शासन को सौंपी जा चुकी है।

हल्द्वानी में नाबालिग लाडली की हत्या के बाद विगत 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पीड़ित परिवार को सांत्वना देने उनके घर गए थे।

लौटते समय कुछ भाजयुमो कार्यकर्ताओं व स्थानीय लोगों ने नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद वहां मौजूद पत्रकारों पर पुलिस का बर्बर लाठीचार्ज हुआ।
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आईएएस शैलेश बगोली को सौंपी जांच रिपोर्ट

घटना की गंभीरता को देखते हुए बाद में वरिष्ठ आईएएस शैलेश बगोली को जांच सौंपी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि सभी पक्षों के बयानों केबाद यह स्पष्ट नहीं हुआ कि लाठीचार्ज किसके कहने पर किया गया।

संयम, नियंत्रण, अनुशासन पुलिस बल के अनिवार्य गुण है लेकिन इस घटना में इनका प्रयोग करने के बजाय लाठीचार्ज कर दिया गया, जिसकी जरूरत ही नहीं थी।

बगोली ने रिपोर्ट में कहा है कि उस दिन मुख्यमंत्री का कार्यक्रम लिखित में पुलिस को प्राप्त नहीं हुआ था। इसलिए रिहर्सल आदि भी नहीं हुआ। इस लापरवाही की उपेक्षा नहीं की जा सकती।

शीशमहल क्षेत्र के खनन गेट को बंद करने व जनाक्रोश का मूल्यांकन करने में अभिसूचना तंत्र और पुलिस अफसर असफल साबित हुए।
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चालक ने कभी नहीं चलाया था वीआईपी वाहन

पीड़ित परिवार की गली में भी सीएम के लिए पर्याप्त सुरक्षा नहीं थी, पुलिस अफसरों ने सुरक्षा घेरा तैयार करने के बजाय मानव श्रृंखला घेरे में लेकर उनको वाहन में बैठा दिया। यदि यह घेरा फ्लीट तक होता तो घटना टल सकती थी।

स्थानीय अभिसूचना इकाई व सिविल पुलिस द्वारा वीवीआईपी मूवमेंट के लिए रिहर्सल रिपोर्ट, कार्रवाई रिपोर्ट व सुरक्षा अलर्ट तैयार नहीं कर प्रोटोकॉल की अनदेखी हुई।

रिपोर्ट में इस बात पर हैरानी जताई गई कि उस दिन मुख्यमंत्री की गाड़ी अनाड़ी चालक के हाथ दे दी गई। उनकी कार मो. आमिर चला रहा था। इस चालक ने पूर्व में कोई वीवीआईपी वाहन नहीं चलाया था।

यदि चालक दक्ष होता तो भी इस घटना पर नियंत्रण पाया जा सकता था, क्योंकि वाहन को स्टार्ट कर कुछ मीटर आगे किसी एक व्यक्ति के लिए रोकना फ्लीट के नियमों का उल्लंघन है। इससे जाहिर होता है कि उसे नियमों की भी जानकारी नहीं थी।
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