मुख्यमंत्री ने कहा कि अब चक्रिय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) का का समय आ चुका है, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में कारगर साबित होगा। कचरे को सिर्फ कचरा न समझकर एक संसाधन के तौर पर देखने की आवश्यकता है। इससे आम लोगों को आजीविका के साथ-साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। आज देश में कई स्टार्टअप इस दिशा में नई तकनीक व उत्पाद के साथ सामने आ रहे हैं। इससे पूर्व उद्घाटन सत्र शुभारंभ वन मंत्री सुबोध उनियाल ने किया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण आरके सुधांशु, निदेशक पर्यावरण एसपी सुबुद्धि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सुशांत पटनायक, संयुक्त निदेशक पर्यावरण नितेश मणि, वर्चुअल माध्यम से विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर युगल किशोर पंत आदि उपस्थित थे।
ईपीआर रजिस्ट्रेशन में उत्तराखंड आगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से प्लास्टिक उत्पादन से संबंधित उद्योग, इकाई की ओर से ईपीआर रजिस्ट्रेशन के संबंध में उत्तर भारत में उत्तराखंड वर्तमान में अग्रणी है, जो निश्चित रूप से एक गौरव का विषय है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला में किया जाने वाला मंथन निश्चित रूप से हमारे उद्यमियों और आम जनता को अपने प्रतिष्ठान, घर, शहर और गांव के साथ ही पूरे राज्य को स्वच्छ बनाने में सहयोग करेगा।