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सीएम धामी ने की प्रेसवार्ता: महिला आरक्षण बिल के विरोध को लेकर विपक्ष पर जड़े आरोप, कहा-ये नारी शक्ति का अपमान

Sun, 19 Apr 2026 03:43 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

महिला आरक्षण बिल को लेकर सीएम धामी ने कहा कि जिस तरह से बिल का विरोध हुआ ये पूरी नारी शक्ति का अपमान है।
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सीएम धामी ने की प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विस्तार
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र्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि हम देश की नारी को विश्वास दिलाते हैं, उनका अधिकार अवश्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सबका साथ, सबका विकास के मूल मंत्र पर चलते हुए, आधी आबादी को उनका पूरा हक प्रदान करने का प्रयास किया ताकि मातृशक्ति विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी क्षमता से योगदान दे सके। जिस तरह विधेयक के सदन में गिरने पर कांग्रेस समेत विपक्ष ने जश्न मनाया, उससे ऐसा लगा कि जैसे उन्होंने मातृशक्ति को हरा दिया हो। जबकि इतिहास साक्षी है कि मातृशक्ति कभी हारती नहीं है।

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16 और 17 अप्रैल को संसद में हुई चर्चा केवल कुछ विधेयकों तक सीमित नहीं थी। यह देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में समान भागीदारी देने का एक महत्वपूर्ण अवसर था, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने इस ऐतिहासिक अवसर का भी विरोध किया। विपक्ष ने सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता दी। देशहित से ऊपर दलगत सोच को रखा।

सीएम धामी ने प्रदेश के परिपेक्ष्य में कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण सहित यहां के पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन में मातृ शक्ति का योगदान अतुलनीय है। अगर यह संविधान संशोधन विधेयक पारित हो जाता तो मातृ शक्ति को राजनीतिक रूप से सशक्त और नीति निर्माण में उनकी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित होती। ऐसे समय में उनके संवैधानिक अधिकारों को टालना केवल विधायी देरी नहीं, बल्कि सामाजिक प्रगति में बाधा उत्पन्न करना है।
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धर्म आधारित आरक्षण की मांग तुष्टिकरण की राजनीति को दर्शाती है

सीएम ने महिला अधिकारों के मुद्दों पर कांग्रेस का रिकॉर्ड भी खराब बताया। कहा यही नहीं, कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निर्णयों और विधेयकों का भी हमेशा विरोध किया है। समाजवादी पार्टी की धर्म आधारित आरक्षण की मांग तुष्टिकरण की राजनीति को दर्शाती है और यह संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। वहीं, परिसीमन को लेकर विपक्ष ने जो आशंकाएं व्यक्त की गईं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं है।  
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