ये हैं प्रमुख चुनौतियां: सिडकुल की स्थापना
सिडकुल की स्थापना का एलान 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और 2021 में मौजूदा सीएम पुष्कर सिंह धामी ने खुद किया है। अब तक इस दिशा में कुछ भी पहल नहीं हुई है। लोगों को उम्मीद है कि टनकपुर-बनबसा में सिडकुल की स्थापना कर उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
सेहत को संवारना
चंपावत जिला अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार करते हुए उसे बेस अस्पताल का दर्जा दिलाना। डायलिसिस यूनिट, टनकपुर उप जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड परीक्षण की सुविधा, सर्जरी शुरू करवाने के अलावा हृदयरोग विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों को भरना। नर्सिंग कॉलेज का इसी सत्र से संचालन करवाना भी चुनौती से कम नहीं है।
ग्रामीण विकास और ग्रामीण सुविधाओं का विस्तार
सूखीढांग-डांडा-मीडार सड़क से लेकर कई ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क में डामरीकरण व अन्य सुविधा को विस्तार दिया जाना है। नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों की लचर मोबाइल नेटवर्किंग में सुधार की जरूरत है। ग्रामीण सड़कों में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को विस्तार दिया जाना है।
पर्यटन
जिले के आर्थिक विकास के लिए पर्यटन सबसे महत्वपूर्ण है। पूर्णागिरि में रज्जुमार्ग का निर्माण लटका है। गोल्ज्यू कॉरिडोर से लेकर मां बाराही धाम, मां पूर्णागिरि धाम, बाबा गोरखनाथ, श्यामलाताल, ब्यानधुरा का सर्किट बनाए जाने की जरूरत है।
तकनीकी और उच्च शिक्षा
लटके कार्यों को शुरू करवाना
चंपावत जिला जेल का निर्माण 2012 से रुका है। जमीन नहीं मिलने से चंपावत के स्टेडियम का काम शुरू नहीं हो सका है। बनबसा में एलपीजी एजेंसी की स्थापना और स्याला-पोथ मोटर मार्ग को मां पूर्णागिरि धाम से जोड़ना भी चुनौती से कम नहीं है।