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सीएम दरबार में खुली उनकी सरकार की पोल

Mon, 06 Jan 2014 10:50 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी देहरादून में रविवार को लगे सीएम दरबार में खुद राज्य सरकार की योजनाओं की पोल खुलती नजर आई।
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मुख्यमंत्री आवास के सामने लंबी कतारें
रविवार सुबह 9.30 बजे से ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री आवास के सामने लंबी कतारें लगना शुरु हो गई थी। मौका था आपदा के छह माह बाद मुख्यमंत्री आवास के सभागार में लगे जनता दरबार का।

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पतले से दरवाजे से दो कतारों में आदमी और औरतें दाखिल हो रहे थे। तलाशी के बाद लोग सभागार में पहुंच पा रहे थे। चारों तरफ पुलिस मुस्तैद रही।

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने एक-एक व्यक्ति के पास जाकर प्रार्थना पत्र लिया। वह व्यक्ति जब तक कुछ कह पाता है सीएम प्रार्थना पत्र को मार्क करके अधिकारी को दे रहे थे।
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अफसरों ने उनके चारों तरफ घेरा बनाया हुआ था। एक बुजुर्ग प्रार्थना पत्र देने के बाद कुछ कहना चाह रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने ‘बस-बस हो गया’ कहते उन्हें सभागार से बाहर कर दिया।

90 फीसदी फरियादियों को आर्थिक मदद
देहरादून के अलावा पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, हरिद्वार, नैनीताल, उधमसिंह नगर से फरियादी आए हैं। 90 फीसदी फरियादियों को आर्थिक मदद चाहिए। कोई गरीबी से तबाह है तो कोई बीमारी से।

अनारवाला के बलवीर गुरुंग के ब्रेन सर्जरी हुई है और बेटा टोनी गुरुंग विकलांग है। बिल एक लाख 35 हजार बना था। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष में विधायक के माध्यम से अर्जी लगाई थी। आज तक मदद नहीं मिली।

त्यूनी के राजेंद्र को मांसपेशियों की तकलीफ है। डॉक्टर ने ढाई लाख का खर्च बताया है। रेसकोर्स के मंगू राम प्रार्थना पत्र देकर बता रहे हैं कि दोनों टांगें खराब हो गई हैं।

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दोपहर के 12 बजे गए हैं। मुख्यमंत्री पुरुषों की तरफ से अचानक बाईं तरफ कुर्सियों पर बैठीं महिलाओं की तरफ मुड़ गए। चमोली की मालती फूट-फूटकर रो पड़ीं। छोटे-छोटे पांच बच्चे हैं। आपदा में पति मर गए। परेशान मत हो कह मुख्यमंत्री ने प्रार्थना पत्र मार्क करके एक अफसर को दे दिया।

तभी चंदर रोड की रोशन जहां गिड़गिड़ाईं कि आंख का परदा फट गया है। पति बीमार हैं। मुख्यमंत्री ने सिर हिलाया। जनता दरबार समय की सीमा पार कर रहा है। मुख्यमंत्री ने तेजी से प्रार्थना पत्र मार्क करने शुरू कर दिए।

मुख्यमंत्री से मिल नहीं पाईं
महिला पुलिस ने फरियादियों से प्रार्थनापत्र लेने शुरू कर दिए। वे मुख्यमंत्री से मिल नहीं पाईं। बाहर जाकर हल्ला मचा रही हैं। जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम उन्हें जाकर अंदर ले आए।

दोपहर के एक बजे मुख्यमंत्री सभागार में एक तरफ बैठ गए। वहीं मेज लगा दी गई। बाहर से सभी लोग अंदर आ गए। फरियादियों में आगे आने को धक्का-मुक्की हो गई। कुछ लोग बचे हैं। मुख्यमंत्री चल दिए।

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जो फरियादी रह गए उन्हें अफसरों ने रोक दिया। अब सभागार परिसर से बाहर जाने वाला रास्ता बंद है। जनता दरबार से जाने वालों में से अधिकतर का यही कहना था अर्जी दी है अब राहत का इंतजार है...।

मुख्यमंत्री जी, मुझे पढ़ना है, पैसा नहीं है
मुख्यमंत्री के जनता दरबार में वैसे तो सारे लोग मदद मांगने पहुंचे थे लेकिन कुछ दृश्य ऐसे दिखे जो सिस्टम की पोल खोल रहे थे। 12 साल का लड़का, अकेला हाथ में प्रार्थना पत्र लिए मुख्यमंत्री के सामने जा खड़ा हुआ।

अधिकार से बोला कि मुख्यमंत्री जी, मुझे पढ़ना है, मेरे पास पैसा नहीं है।’ मुख्यमंत्री उसका चेहरा देखने लगे। ‘मेहूंवाला में रहता हूं। मेरा नाम मोहम्मद आशिक है। कक्षा आठ में पढ़ता हूं।’ अपनी बात कह ली, फिर प्रार्थना पत्र दिया।

योजनाओं की पोल खोली
मुख्यमंत्री के मुंह से ‘ठीक है’ निकलते ही चल दिया। इसके बाद एक और लड़की ने योजनाओं की पोल खोली। नालापानी की रहने वाली अनुसूचित जाति की सोनम ने बीएड का इंट्रेंस टेस्ट पास किया है। लेकिन पैसा न होने से प्रवेश नहीं ले पाई।

पिता शेर सिंह मजदूर हैं और इस वक्त बीमार हैं। सोनम चार बहनें हैं। उसे समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई। उमेश कुमार ने बताया कि वह बीटेक कर रहा है। पैसे की कमी से पढ़ाई बाधित हो रही है।
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मुख्यमंत्री ने 43 हजार धनराशि स्वीकृत करने का वादा किया। पैरा ओलंपिक खिलाड़ी प्रेम कुमार ने बताया कि उन्होंने राज्य के लिए कई पदक जीते हैं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलना चाहते हैं। आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं।

मुख्यमंत्री ने हर संभव मदद का वादा किया। विकासनगर के राकेश कुमार ने शिकायत की कि गौरादेवी कन्या धन योजना के तहत 50 बालिकाओं को छात्रवृत्ति नहीं मिली।
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