उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के चाय नाश्ते का खर्च 57 लाख रुपए है।
जी, हां जितना रुपया 18 माह में मुख्यमंत्री कार्यालय और आवास में केवल चाय-नाश्ते और खाने में खर्च किया गया है। उतने के आठ प्री फेब्रिकेटिड मकान बन सकते थे।
आरटीआई में खुलासा
यह खर्च भी मार्च 2012 से लेकर अगस्त 2013 तक का है। साफ है कि मुख्यमंत्री हर दिन दस हजार रुपए तो चाय पिलाने और नाश्ता कराने में ही खर्च कर रहे हैं।
हल्द्वानी के आरटीआई एक्टिविस्ट गुरविंदर चड्डा की ओर से आरटीआई में मांगी गई जानकारी से यह खुलासा हुआ।
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इन 18 महीनों में मुख्यमंत्री कार्यालय में 27 लाख 34 हजार 153 रुपए चाय नाश्ते और खाने पीने में खर्च हुए। यह आतिथ्य सत्कार मुख्यमंत्री आवास पर भी इसी तरह से हुआ। मुख्यमंत्री आवास पर इस दौरान 29 लाख 40 हजार 575 रुपए खर्च हुए।
मुख्यमंत्री के आरटीआई लोक सूचना अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक इन 18 महीनों में चाय नाश्ते पर कुल मिलाकर 56 लाख 74 हजार 728 रुपए खर्च हुए।
सरकार आपदा प्रभावितों के लिए प्री फेब्रीकेटिड मकान करीब सात लाख रुपए में एडीबी और विश्वबैंक की मदद से बना रही है।
करीब दस हजार रुपए रोजाना का खर्च
जाहिर है कि इतनी राशी में आठ परिवारों को यह मकान तो दिलवाए ही जा सकते थे। दूसरी तरफ हर दिन चाय और खानपान का खर्च करीब दस हजार रुपए है।
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आरटीआई कार्यकर्ता गुरविंदर चड्डा का कहना है कि केंद्र सरकार तो कहती है कि हर रोज 15 रुपए में पेट भर सकता है। सरकार एक तरफ मितव्ययता की बात कर रही है तो दूसरी तरफ खर्च लगातार बढ़ रहा है।
...तो और भी महंगी पड़ती खातिरदारी
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का दिल्ली प्रेम जगजाहिर है। कभी काम तो कभी पारिवारिक कारणों से उन्हें दिल्ली की ओर माह में दो-तीन दिन दिल्ली का रुख करना पड़ता है।
विपक्ष तो अब खुलकर कहता है कि मुख्यमंत्री का आधा समय उत्तराखंड और आधा समय दिल्ली में बीतता है।
अगर मुख्यमंत्री गाहे बगाहे ही दिल्ली की ओर रुख करते तो यह खर्च दोगुना हो गया होता। अब यह अलग बात है कि मुख्यमंत्री दिल्ली में रहते हों और उनकी पीठ पीछे उनके आवास और कार्यालय पर भी मेहमानों की पूरी खातिरदारी होती हो।
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