देहरादून के सरखेत गांव में 15 अगस्त को आसमान से बरसी आफत ने सबसे पहला मकान जो ढहाया, वह मदन सिंह का था।
चंद मिनट पहले मदन का पूरा परिवार थोड़ा बहुत सामान समेटकर सुरक्षित निकल तो गया, लेकिन अब ‘उधार’ की जिंदगी बसर कर रहा है। ग्रामीणों की मदद से परिवार की रोजी चल रही है।
लेकिन अब मदन की परेशानी वह वह भार है, जो खेती के लिए उन्होंने मालदेवता स्थित बैंक से 50 हजार रुपए लोन के तौर पर लिया था। खेती के मलबे में तब्दील होने के बाद मदन को हर वक्त यह चिंता खाए जा रही है कि वह लोन कैसे चुकाएंगे।
उनकी नजरें सरकार पर टिकी हैं। मदन को उम्मीद है कि सरकार उनका ऋण माफ करेगी।
पुराने अदरक ने दिया साथ
मदन सिंह के खेतों में पिछले साल अदरक की बेहतर फसल हुई थी। आपदा ने इस बार की फसल तो तबाह कर दी, लेकिन पुराना अदरक काम आया।
मदन ने इसे बेचकर करीब 32 हजार की रकम बैंक का चुका दी है। लेकिन बाकी 18 हजार रुपए और ब्याज चुकाने की अब उनमें सामर्थ्य नहीं है।
कमरे में सिर्फ चारपाई की जगह
प्राथमिक विद्यालय के जिस एक कमरे में यह परिवार रह रहा है, वहां सिर्फ एक चारपाई रखने की जगह है। ऐसे में पति-पत्नी, दो बेटों, बहुओं और तीन पोते-पोतियों वाले नौ सदस्यीय इस परिवार को पड़ोसियों के यहां रात गुजारनी पड़ती है।
बेटा नहीं जा रहा ड्यूटी पर
मदन का बड़ा बेटा बलबीर पीआरडी जवान है। उसे हर रोज ड्यूटी के एवज में मजदूरी मिलती थी। लेकिन आपदा के बाद से बलबीर अब तक ड्यूटी पर नहीं जा सका है। उसे डर है कि कहीं उसके जाते ही फिर आसमान से आफत न बरस जाए।
घर गवां चुके बलबीर पर आपदा का खौफ इस कदर तारी है कि अब उसे हल्की बारिश भी परिवार को छीनने वाली नजर आती है। मदन का छोटा बेटा प्रदीप घर पर ही रहकर खेतीबाड़ी करता था।a