देहरादून के दिल घंटाघर की घड़ी की धड़कन जुगाड़ से धड़क रही है।
करीब 60 साल पुराने घड़ी का एक-एक पार्ट घिस गया है। लेकिन नगर निगम इसकी मरम्मत नहीं करा रहा है। पांच साल से घंटाघर की घड़ी की मरम्मत के लिए नियुक्त मेकेनिकल इंजीनियर अशोक खन्ना ने बताया कि घड़ी की छह सुईयां खास हैं।
बताया कि निगम ने मुझसे पहले जिसे भी मरम्मत की जिम्मेदारी सौंपी, उसने इसकी दुर्दशा कर दी। पहले होटल फारेस्ट और फिर गढ़वाल मंडल विकास निगम को इसकी मरम्मत का जिम्मा सौंपा गया था। पहले घड़ी की घंटी चोरी हुई। फिर आंधी तूफान में कई पार्ट्स टूट गए।
अब इसमें केवल टाइम मशीन बची है। एक कुंटल के कांसे की घंटी चोरी होने के बाद भी निगम ने कार्रवाई नहीं की। जब मेरे पास घड़ी की मरम्मत की जिम्मेदारी आई तो मैंने चोरी हुए और इसके डैमेज पार्ट लांग व्हील, ओवर व्हील आदि पार्ट बनाए।
इसके बाद घड़ी चलने लगी। बताया कि घड़ी में छह डायल पर 24 गरारियां हैं। मरम्मत के बाद आठ गरारियां लगाई गई। लेकिन बाकी पुरानी गरारियां नहीं बदलने से घड़ी को चलने में अवरोध पैदा हो रहा है। बताते हैं कि निगम को मरम्मत के लिए कई बार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला रह है।
घड़ी के ये पार्ट ठीक कराने जरूरी
घंटाघर की घड़ी में 24 गरारियां लगी हैं, जिससे सुईयां चलती हैं। इसमें एक लीवर, एक स्कैप, एक सेकंड व्हील, एक फ्रस्ट व्हील, दो ओवर व्हील, एक क्रेक व्हील और एक क्राउन व्हील है। यह पार्ट खराब हैं, जिन्हें ठीक करना है।
मुख्य गरारी, जिससे सुईयां चलती हैं, इसे क्राउन व्हील कहते हैं, वह जर्जर हो चुकी है। इसकी कीमत 1,95,000 है। आंधी-तूफान के कारण घंटाघर की घड़ी के तीन जगह के डायल टूट चुके हैं, जिन्हें बदला जाना जरूरी है। इनकी कीमत छह सौ रुपए प्रति वर्ग फुट है।