जलवायु परिवर्तन का असर हिमालयी क्षेत्र में नजर आने लगा है। जैव विविधता और इको सिस्टम सर्विसेस को गति देने वाले सूक्ष्म जीव गायब हो गए हैं।
साथ ही बहुत सी छोटी वनस्पतियां जो मिट्टी को बांधने और पानी की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं, अब लापता हैं। साथ ही हिमालयी क्षेत्र की जलसंरचना की नलिकाएं छोटी नदियां विलुप्त हो गई हैं। देश-विदेश के विज्ञानियों ने इन हालात पर चिंता जाहिर कर इसे खतरे का संकेत माना है।
भारतीय वन्य जीव संस्थान में संयुक्त राष्ट्र के आईपीबीईएस कैपेसिटी बिल्डिंग फोरम के बैनर तले आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि जैव विविधता और इको सिस्टम के मामले में इस वक्त हिमालयी क्षेत्र विश्व का ‘हॉट स्पॉट लैब’ माना जा रहा है। इससे भारत, नेपाल और चीन के अलावा दूसरे एशियाई देशों की जैव विविधता और इको सिस्टम जुड़ा हुआ है।
जलवायु परिवर्तन के साथ इको सिस्टम सर्विसेस का ‘नेच्युरल रिजनरेशन’ से अधिक दोहन यहां की जैव विविधता के लिए खतरा बन गया है। इंटरनल कंजरवेशन यूनियन फॉर नेचर के इको सिस्टम मैनेजमेंट कमीशन के साउथ एशिया चेयर पर्सन नेपाल के डॉ. माधव कार्की का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र के 10 से 25 फीसदी सूक्ष्म जीव और वनस्पतियां गायब हो गई हैं।