संविदा सफाई कर्मचारियों को स्थायी करने को लेकर 8 मई से प्रस्तावित हड़ताल के मुद्दे पर नगर निगम सभागार बुलाई गई मीटिंग में जबरदस्त हंगामा हुआ। राष्ट्रीय वाल्मीकि क्रांतिकारी मोर्चा और सफाई कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी आपस में भिड़ गए। दोनों संगठनों के नेताओं-पदाधिकारियों ने एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए।
अपर मुख्य नगर अधिकारी ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को शांत कराया। मीटिंग बेनतीजा समाप्त हो गई। यह फैसला भी नहीं हो पाया कि 8 मई से हड़ताल होगा या नहीं।
नगर निगम सभागार में शुक्रवार को आयोजित मीटिंग में यह तय होना था कि 8 मई से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल होनी है या नहीं। सफाई कर्मचारी यूनियन नेता मीनू गागट व उनके साथी जहां हड़ताल के पक्षधर थे। वहीं राष्ट्रीय वाल्मीकि क्रांतिकारी मोरचा के चंद्रमोहन काला, मदन वाल्मीकि, राजेंद्र केसला और जयपाल वाल्मीकि हड़ताल के पक्ष में नहीं थे। उन्हें सफाई कर्मचारी आयोग के पूर्व अध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना का भी समर्थन प्राप्त था।
हड़ताल पर नहीं बनी सहमति
मीटिंग शुरू भी हुई, भाषणबाजी भी हुई, लेकिन 8 मई से प्रस्तावित हड़ताल को लेकर सहमति नहीं बन सकी। मीटिंग के दौरान ही आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। नौबत मारपीट तक आ पहुंची। लेकिन नगर निगम के अपर मुख्य नगर अधिकारी भगवत प्रसाद मिश्रा ने किसी तरह मामले को संभाला। अगर उन्होंने हस्तक्षेप न किया होता तो मारपीट होनी तय थी।
इस मौके पर सफाई कर्मचारी नेता अरविंद घावरी, सोनू सेलवान आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इससे पहले दोनों ही संगठन के नेताओं द्वारा मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह को ज्ञापन प्रेषित किए गए।