हरिद्वार में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में गंगा को हरिद्वार में प्रदूषणमुक्त बनाने पर विचार हुआ।
शनिवार की शाम कैबिनेट ने हरिद्वार में गंगा में गिर रहे नालों के पानी को कैनाल के माध्यम से शहर से बाहर निकालने को स्वीकृति प्रदान की। इसके लिए सिंचाई विभाग को बजट देने पर भी सहमति बनी।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बताया कि कैबिनेट ने इस बार पर जोर दिया कि गंगा में केवल शोधित जल ही जाए। नाले सीधे गंगा में न गिरने पाएं। सिंचाई विभाग को कहा गया है कि गंगा में गिर रहे नालों को कैनाल के माध्यम से शहर से बाहर करने का प्रस्ताव तैयार करें।
इसके लिए जो छह-सात करोड़ रुपए खर्च होंगे, कैबिनेट ने उसकी मंजूरी भी दे दी है। इस समय हरिद्वार शहर के बीच सात बड़े नाले सीधे गंगा में गिर रहे हैं। बड़े-बड़े आश्रम भी सीधे गंगा में गंदगी डाल रहे हैं। इतना ही नहीं हरिद्वार जिले में 78 होटल ऐसे हैं जो गंगा को गंदा कर रहे हैं।