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गंगा की धारा निर्मल करना बेहद मुश्किल!

Thu, 18 Sep 2014 10:44 AM IST
सुधाकर भट्ट / अमर उजाला, देहरादून
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गंगा की अविरलता और निर्मलता के मसले पर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती और मुख्यमंत्री हरीश रावत भले ही ऊपरी तौर पर सहमति दिखाएं लेकिन गहराई में जाएं तो पता चलता है कि सतह पर दिखने वाली बाधाएं तो बेहद मामूली हैं, असल अड़चनें तो तलहटी में हैं।
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उमा भारती गंगा सफाई का काम उत्तराखंड से शुरू करने की बात कर रही है। मुख्यमंत्री गंगा की अविरलता और निर्मलता पर कोई विवाद न होने की बात कर रहे हैं।

जबकि अविरलता का सारा मसला जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़ा हुआ है जिसकी इन दिनों प्रबल पैरोकारी में राज्य सरकार दिन-रात एक किए है।

अभी कोई स्पष्ट राह नहीं बनी

इसी तरह से निर्मलता का सवाल गंगा किनारे बने तमाम मठ, मंदिर और आश्रमों से किसी न किसी रूप में जुड़ रहा है। इस पर प्रदेश सरकार कन्नी काट रही है और उसकी कोशिश है कि साध्वी उमा भारती ही अपने स्तर से इसे निपटाएं।

गंगा की सफाई पर जल मंत्री और मुख्यमंत्री की देहरादून में बुधवार को हुई बैठक में अभी कोई स्पष्ट राह नहीं बन पाई है।

बैठक में यह बात सामने आई कि उत्तराखंड में कई स्थानों पर गंगा में सीधा कचरा आ रहा है जिसकी रोक के लिए जल्द कार्ययोजना लागू होगी।

बैठक में उमा भारती ने कहा कि अविरल और निर्मल धारा की परियोजनाओं को पीपीपी मोड में पूरा किया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार का पूरा सहयोग करने का इरादा जाहिर किया। लेकिन ये काम इतने आसान नहीं हैं।

जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण पर विवाद

जून 2013 की आपदा के बाद से प्रदेश की नदियों पर जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण पर खासा विवाद खड़ा हो गया है। पर्यावरणविदों का एक पक्ष नदियों पर बांध बनाए जाने के सख्त खिलाफ है।

दूसरी तरफ, प्रदेश सरकार का मानना है कि प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परियोजनाएं जरूरी हैं। प्रदेश में 27 हजार मेगावाट की क्षमता है और उत्पादन केवल साढ़े तीन हजार मेगावाट का है।

भागीरथी पर ही करीब 70 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इनमें से 23 परियोजनाओं पर रोक भी लगा दी थी। कभी खुद उमा भारती इन परियोजनाओं के विरोध में रही हैं। यह सवाल अभी सुलझा नहीं है।
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सीवरेज का गंदा पानी सीधे गंगा में

इसी तरह गंगा की निर्मलता का मसला सीधे-सीधे उन कई आश्रमों और मठ मंदिरों से भी जुड़ा हुआ है जो उत्तरकाशी से लेकर हरिद्वार तक गंगा के किनारे बसे हुए हैं और जिनसे सीवरेज का गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है।

बैठक में जब यह सवाल मुख्यमंत्री के सामने उठा तो वे खासी चतुराई से इस मामले से किनारा कर गए। ऋषिकेश से हरिद्वार तक मलिन बस्तियों का जाल बिछा हुआ है। लक्ष्मण झूला तक पानी की गुणवत्ता ए श्रेणी की है तो हरिद्वार और ऋषिकेश में यह बी श्रेणी की है।

गंगा में गिर रही गंदगी को लेकर साधु-संतों से बात करने का काम उमा भारती जी संभाले। मैं तो संसारी आदमी हूं। संसारी लोगों को मनाने और समझाने का काम मेरा।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री
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