केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त ने सूबे के मुख्य सचिव से बहुचर्चित एनआरएचएम दवा घोटाला प्रकरण में सीबीआई जांच प्रक्रिया की अब तक की गई कार्रवाई (एक्शनटेकन) की रिपोर्ट तलब की है।
एनआरएचएम दवा घोटाले का यह प्रकरण तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल का है। केंद्र सरकार ने गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य लाभ के लिए 600 करोड़ आवंटित किए थे। दवाओं की खरीद में भ्रष्टाचार किया गया था और लाखों रुपये मूल्य की दवाइयों को एक्सपायर होने दिया गया। बाद में ड्रगवेयर हाउस रुड़की से जंगल व नालों फिंकवा दिया गया था। अमर उजाला ने एक्सपायर दवा घोटाले को उजागर किया था।
बिना मुकदमा नहीं शुरू हो सकती सीबीआई जांच
सुभाष घाट हरिद्वार निवासी रमेश चंद्र शर्मा ने सूचना अधिकार के माध्यम से दवा घोटाले को उठाया था। तत्कालीन राज्य सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से वांछित सूचनाएं नहीं देने और भ्रष्टाचार होना मानते हुए सीबीआई से जांच कराने के आदेश पारित किए थे।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी 11 अप्रैल 2014 ने सीबीआई जांच के दे दिए थे और गृह विभाग ने 29 अप्रैल को नोटिफिकेशन जारी कर दिया था, किंतु भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों ने सीबीआई जांच का दबाए रखने के लिए अब मुकदमा दर्ज नहीं किया है। शर्मा का कहना है कि जब तक पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज नहीं होगा तब तक सीबीआई जांच शुरू नहीं होगी। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा है।
रमेश चंद्र शर्मा ने इस घोटाले पर कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री को पत्र भेजा था। द्वितीय अपील में केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त राधाकृष्णा माथुर ने 21 जुलाई को पारित अपने आदेश में दवा घोटाला की जांच सीबीआई से कराने के 9 जुलाई 2014 के आदेश पर मुख्य सचिव उत्तराखंड से 30 दिन के अंदर एक्शनटेकन रिपोर्ट मांगी है।