मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से प्रसिद्व चोपता-तुंगनाथ क्षेत्र पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के बीच अब प्लास्टिक कचरे की समस्या से जूझ रहा है। मक्कूमठ से चोपता बाजार और तुंगनाथ-चंद्रशिला ट्रैक तक सड़क किनारे और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों में जगह-जगह प्लास्टिक बोतलें और कचरा नजर आ रहा है। वहीं बारिश के पानी के साथ बहकर यह कचरा संवेदनशील क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा है।
चोपता-तुंगनाथ क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ दुर्लभ वन्यजीवों और बुग्यालों व औषधीय पादपों के लिए भी महत्वपूर्ण है। क्रिसमस, न्यू ईयर और पर्यटन सीजन में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। खासकर चंद्रशिला ट्रैक युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है लेकिन बढ़ते पर्यटन के साथ कचरे का दबाव भी बढ़ रहा है। स्थानीय स्तर पर चंद्रशिला ट्रैक पर पर्यटकों की संख्या सीमित करने की मांग उठ रही है, ताकि बुग्यालों और प्राकृतिक क्षेत्र को नुकसान से बचाया जा सके।
गेट की व्यवस्था की संभावनाओं पर विचार
इन सब कारणों को ध्यान में रखते हुए वन विभाग की भी इस क्षेत्र के संरक्षण और संवर्धन को लेकर रास्ते खोजे जा रहे हैं। केदारनाथ वन्यजीव विहार के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र को देख रहे चमोली डीएफओ रजत सुमन ने बताया कि क्षेत्र के संरक्षण को देखते हुए चंद्रशिला ट्रैक पर पर्यटकों की संख्या निर्धारित करने तथा प्रवेश के लिए गेट की व्यवस्था की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद रहने के दौरान चंद्रशिला ट्रैक पर आवाजाही सीमित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही क्षेत्र में प्लास्टिक कचरा हटाने के लिए अभियान चलाने और लोगों को जागरूक करने की योजना है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में पर्यटन के बढ़ने से चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे में पर्यटन के साथ क्षेत्र के संरक्षण एवं संवर्धन को भी गंभीरता से लिया जा रहा है।