कहा, उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड का गठन इस्लामिक धार्मिक शिक्षा देने के उद्देश्य से एक कानून के द्वारा किया गया है। यह कानून कहता है कि मदरसे इस्लामिक तालीम देने के स्थान होंगे। कहा, इन मदरसों में हिंदू बच्चों का क्या काम। उत्तराखंड राज्य ही अपनी संस्कृति और पहचान को बचाए रखने के लिए बनाया गया है। ऐसे में हिंदू बच्चों को मदरसों में पढ़ाया जाना राज्य की मूल अवधारणा के विपरीत है।
कहा, इन बच्चों के माता-पिता से बात कर स्कूल में दाखिला कराया जाएगा। बैठक में बताया गया कि राज्य में बड़ी संख्या में मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं। जिनकी संख्या 400 से अधिक है। मदरसों की मैपिंग के मसले पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने बताया कि डीएम इसमें सहयोग नहीं कर रहे। मीडिया से वार्ता के दौरान राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डा. गीता खन्ना भी मौजूद रही।
प्रदेश की इन योजनाओं को साझा करेगा आयोग
आयोग अध्यक्ष ने कहा, कोविड के दौरान प्रभावित बच्चों को उत्तराखंड में विशेष योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जा रही है। आयोग इस जानकारी को अन्य राज्यों के साथ साझा करेगा। वहीं, दिव्यांग बच्चों को पेंशन दी जा रही है, जो अन्य राज्यों के लिए उदाहरण है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 55 हजार बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। सात हजार बच्चों को पेंशन दी जा रही है। मेडिकल कैंप लगाकर सभी चिह्नित बच्चों को स्वास्थ्य प्रमाणपत्र दिए जाएं, ताकि उन्हें पेंशन आदि की सुविधा मिल सके।