स्कूल में मानक के अनुसार नहीं है शिक्षक
आरटीई (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम 2009 के अनुसार, प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 है। इसका मतलब है प्रत्येक 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए। 60 छात्रों पर दो और इससे अधिक पर तीन शिक्षक होने चाहिए लेकिन राजधानी के इस स्कूल में 80 छात्र-छात्राओं पर मात्र दो शिक्षिकाएं हैं। यदि एक बीमार हो जाए या विभागीय कार्य से चली जाए तो दूसरी को अकेले पांच कक्षाएं संभालनी होती है।
स्कूल भवन का होना है पुनर्निमाणराजकीय प्राथमिक विद्यालय बापूनगर जाखन के जर्जर हो चुके भवन को ध्वस्त कर उसका पुनर्निमाण किया जाना है। सीईओ विनोद कुमार ढौंडियाल ने लघु सिंचाई विभाग को लिखे पत्र में कहा, ग्रामीण निर्माण विभाग ने स्कूल के निर्माण के लिए 36.87 लाख का आंगणन तैयार किया है। इसका परीक्षण कर उन्हें रिपोर्ट दी जाए। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय तुनवाला दो, आराघर दो धर्मपुर और सहसपुर में मरम्मत कार्य होना है।
यहां भी स्कूल भवन को बना है खतरा
देहरादून। जूनियर हाईस्कूल दार्मिगाड चकराता में भी स्कूल की छत का प्लास्टर गिर रहा है। स्कूल के शिक्षक डॉ सुरेंद्र कुमार आर्यन बताते हैं कि स्कूल में 23 बच्चे और दो शिक्षक हैं।
डोईवाला के इन स्कूलों में नहीं है बाउंड्रीवाल
प्रदेश को दो मुख्यमंत्री देने वाले डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय झड़ौंद और उच्च प्राथमिक विद्यालय सिमलास में बाउंड्रीवाल नहीं है। इससे स्कूल में आवारा मवेशियों और सांप कीड़ों के आने का खतरा बना रहता है। स्कूल परिसर में कूड़े का ढेर भी है।
27 स्कूल पंचायत भवन और निजी आवासों में शिफ्ट
जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक प्रेम लाल भारती के मुताबिक राजधानी के 27 स्कूल भवन जर्जर होने की वजह से इन्हें पंचायत घरों व निजी स्कूलों में शिफ्ट किया गया है।
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सभी स्कूलों के सुरक्षा ऑडिट के साथ ही जर्जर स्कूलों में बच्चों को न बैठाने के निर्देश दिए हैं, ऐसे स्कूलों से अन्य सुरक्षित जगहों पर बच्चों को शिफ्ट किया जाएगा। वहीं, 30 करोड़ रुपये आपदा मद से दिए गए हैं ताकि कहीं जरूरत है तो स्कूल की तुरंत मरम्मत की जा सके। डॉ. धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री