दून में सर्दी की वजह से बच्चे निमोनिया, डायरिया, सर्दी और जुकाम जैसी बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं।
माता-पिता नौनिहालों को इलाज के लिए दून अस्पताल में भर्ती करा रहे हैं, लेकिन यहां भी ठंड उनका पीछा नहीं छोड़ रही है। उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के बच्चा वार्ड में हालत यह है कि मांएं पूरी रात बच्चों को ठंड से बचाने की जद्दोजहद में गुजार देती हैं।
अमर उजाला ने शनिवार और रविवार रात बच्चा वार्ड का जायजा लिया तो परेशान करने वाली हकीकत सामने आई। अस्पताल प्रबंधन बच्चा वार्ड में अभी तक एक हीटर तक की व्यवस्था नहीं कर पाया है।
रविवार रात 8.30 बजे, बच्चा वार्ड एक
निमोनिया से पीड़ित चार साल का बच्चा बेड पर लेटा है। बगल में बैठी मां ने उसे कंबल ओढ़ाया है। ठंड ज्यादा होने से बच्चा बार-बार उठ रहा है।
ठंड से बचाने के लिए मां कभी उसे सीने से लगाती है तो कभी कंबल की दो परत बनाकर ओढ़ाने की कोशिश करती है। पूछने पर कहती है कि ऐसा ही रात पर करना पड़ता है। ठंड की वजह से बच्चा सो नहीं पाता है। बच्चों के वार्ड में हीटर की कोई व्यवस्था नहीं है।
रविवार रात 9 बजे, बच्चा वार्ड एक
रायपुर निवासी महिला पांच साल की बच्ची को वार्ड से सटे केबिन में से भाप दिलाकर बेड पर ले आई। बताया कि डाक्टर ने दो-दो घंटे में बच्चे को भाप देने के लिए कहा है। बार-बार बिस्तर से उठकर जाने से बच्चा ठंड से कांप रहा है। कमरे में हीटर नहीं होने से ठंड की मार बढ़ गई है।
शनिवार रात 8.30 बजे, बच्चा वार्ड दो
बुखार से पीड़ित करीब 7 साल का बच्चा बेड पर लेटा है। मां-पिता उसके समीप कंबल ओढ़कर बेंच पर बैठे हैं। बच्चे को दो कंबल ओढ़ाया गया है। एक अस्पताल से मिला है और दूसरा घर से लाए हैं। बताया कि ऐसा लग रहा है कि कमरे में बर्फीली हवा चल रही है। ठंड के कारण बच्चे का बुखार कम नहीं हो रहा है।
शनिवार रात 10 बजे, बच्चा वार्ड का स्टाफ रूम
नर्सिंग स्टाफ के दो-तीन कर्मचारी कुर्सियों पर बैठे हीटर पर आग सेंक रहे हैं। प्रबंधन ने स्टाफ को ठंड से बचाने के पूरे इंतजाम किए हैं। किसी बच्चे की तबियत बिगड़ने पर जब उन्हें परिजन बुलाते हैं तो कर्मचारी कंबल ओढ़कर वार्ड में पहुंचते हैं। वापस आकर हीटर से खुद को गर्म कर लेते हैं।
वयस्क मरीजों के साथ ही बच्चा वार्ड में भी जल्द ही हीटर की व्यवस्था की जा रही है। कुछ हीटर खराब थे, जिन्हें ठीक कर लिया गया है।
- डॉ. डीएस रावत, कार्यवाहक पीएमएस