बुजुर्ग रामपाल जैसे ही मूर्तियों को प्रवाहित करने जाने लगे तो उनका पोता अथवा महावीर का सात वर्षीय बेटा आर्यन भी दादा के साथ जाने की जिद करने लगा। इस पर रामपाल मासूम आर्यन को अपने साथ ले गए।
गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर घाट पर दोनों पैदल पहुंचे। बुजुर्ग रामपाल मूर्तियों को प्रवाहित करने गंगा किनारे पहुंचे। उन्होंने पोते आर्यन को पीछे रुकने का कहा। इस पर आर्यन गंगा किनारे ढांग के पास खड़ा हो गया। इसी बीच उसके पैरों के नीचे से ढांग ढह गई और वह गंगा की तेज धार में बहने लगा। आर्यन को बहता देख बुजुर्ग रामपाल ने शोर मचा दिया।
शोर सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक मासूम गंगा में लापता हो गया था। सूचना पर अन्य ग्रामीण और भिक्कमपुर चौकी पुलिस भी मौके पर पहुंची। सभी ने गंगा में आर्यन की तलाश की, लेकिन कहीं पता नहीं चल पाया। कोतवाल अमरचंद शर्मा ने बताया कि इस समय गंगा में काफी पानी है। इसलिए बच्चे की तलाश के लिए हरिद्वार से जल पुलिस की टीम को बुलाया गया है।