नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष बुधवार को सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया
मंगलवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सभागार में बार अध्यक्ष एमसी पंत सहित सभी अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश को विदाई दी और स्मृति चिन्ह देकर उन्हें सम्मानित किया।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष ने कहा कि उत्तराखंड में चार साल का समय उनके जीवन का सबसे अच्छा समय रहा। उन्होंने अधिवक्ताओं को राज्य सरकार की ओर से दिए गए सहयोग पर आभार जताया।
उन्होंने कहा कि तीन चार वर्षों से पुराने केसों का निस्तारण न्यायमूर्ति और अधिवक्ताओं के सहयोग से हुआ। उन्होंने नैनीताल में स्थानाभाव में अधिवक्ताओं के आवास और चैंबर की समस्या का समाधान न करा पाने पर मलाल जताया।
इस दौरान बार अध्यक्ष एमसी पंत ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने उनके मुखिया के रूप में वादों की पैरवी के दौरान अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ाया।
महाधिवक्ता यूके उनियाल ने उनके कार्यकाल की सराहना की। विदाई समारोह में न्यायमूर्ति वीके बिष्ट, न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया, न्यायामूर्ति आलोक सिंह, न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी, रजिस्ट्रार जनरल डीपी गैरोला सहित सचिव विजय पाल, उपाध्यक्ष त्रिलोचन पांडे, पूरन सिंह रावत, एमके गोयल, बीडी कांडपाल, मनोज तिवारी, अवतार सिंह रावत, डीके शर्मा, एसके जैन, पीके चौहान, एमएस पाल, हरिमोहन भाटिया, अमरसिंह गिल, लोकेंद्र डोभाल, राजेंद्र डोभाल, गौरा देवी, प्रभा नैथानी, मनोज, संजय भट्ट, आदि अधिवक्ता मौजूद थे।
कलकत्ता हाईकोर्ट से शुरू की थी वकालत
5 जून 1952 को जन्मे नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष ने 19 दिसंबर 1978 को बार काउंसिल में पंजीकरण कराकर कलकत्ता हाईकोर्ट में वकालत शुरू की थी। वह 14 जुलाई 1995 को कलकत्ता हाईकोर्ट में स्थायी जज के रूप में नियुक्त हुए।
उसके बाद उनका स्थानांतरण पटना हाईकोर्ट में हो गया, जहां उन्होंने 7 जनवरी 2005 को चार्ज लिया। उन्हें 24 दिसंबर 2008 को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया।
फिर वह सिक्किम के चीफ जस्टिस बने। 12 अगस्त 2010 को वह नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। उल्लेखनीय है कि नैनीताल हाईकोर्ट में जजों के नौ पद हैं। इसमें से तीन जज स्थानांतरित या सेवानिवृत्त हो गए थे।
अब मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष के सेवानिवृत्त होने के बाद हाईकोर्ट में कुल जजों की संख्या पांच रह जाएगी।