अगर बेटी की शादी करनी है तो कुंडली देखने के बजाए लड़के की एचआईवी फ्री पैथोलोजिकल जांच रिपोर्ट मांगिये।
बिना बताए कर दी शादी
यह सलाह एक बेटी के पिता की है। दरअसल दो साल पहले देहरादून के एक परिवार ने अपने बेटे का एचआईवी संक्रमण छिपाकर लखनऊ में उसकी शादी कर दी थी। एक्सीडेंट में जांच हुई तो यह राज खुला। बाद में हकीकत की सारी परतें उधड़ती चली गईं।
इस परिवार ने लड़के की अच्छी नौकरी के चक्कर में अपनी बेटी की शादी की थी। लड़के को एचआईवी संक्रमण की जानकारी उसके घरवालों को भी थी, लेकिन उन्होंने यह बात छिपाये रखी।
शादी के बाद लड़की को संक्रमण से बचाने के लिए युवक बचाव के तरीके इस्तेमाल करता रहा। लोग जब लड़की से ‘खुशखबरी’ पूछते तो वह अपने पति से कहती। इस पर पति कहता है कि अभी बच्चे नहीं चाहिए।
शादी से पहले पैथोलाजिकल रिपोर्ट देखें
एक दिन लड़का ससुराल गया था। वहां एक्सीडेंट हुआ तो जांच में एचआईवी संक्रमण का खुलासा हुआ। अब लड़की के पिता पछताकर लोगों को सलाह दे रहे हैं कि बेटी के शादी के पहले लड़के की पैथोलोजिकल रिपोर्ट जरूर देख लें।
लड़के का इलाज अब दून अस्पताल के एआरटी सेंटर में चल रहा है। इस युवक अलावा भी यहां कई और मरीज अपनी पहचान छिपाकर इलाज करा रहे हैं।
संक्रमण छिपाने आते हैं दून
मेरठ, दिल्ली, लखनऊ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर आदि जगहों के रोगी इलाज के लिए दून अस्पताल के एआरटी सेंटर आते हैं। यह मरीज अपनी पहचान छिपाने की पूरी कोशिश करते हैं। जब उनसे आईडी प्रूफ मांगा जाता है तो राज खुलता है।
दून अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएस असवाल का कहना है कि इमरजेंसी में तो किसी को भी दो-चार दिन की दवा दी जा सकती है, लेकिन बिना आईडी प्रूफ के सेंटर पर इलाज नहीं हो सकता।