उत्तराखंड सरकार ने फल व सब्जी को मंडी शुल्क से मुक्त करने का फैसला लिया है। कृषि मंत्री के अनुमोदन के बाद सीएम ने अपने विशेषाधिकार के तहत इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।
7.25 करोड़ रुपए का नुकसान
इसी के साथ ही देर रात अधिसूचना जारी कर दी गई। अब फल व सब्जी की 49 प्रजातियां सस्ती दरों पर मिलेंगी लेकिन परिषद को इस सालाना 7.25 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा।
खास तौर पर फल सब्जी की महंगाई को काबू करने के लिए सरकार ने सोमवार को एक बड़ा दांव चला। फल व सब्जी को एपीएमसी एक्ट से बाहर कर मंडी शुल्क से मुक्त कर दिया गया। अभी मंडी शुल्क 1.5 व सैस 0.5 प्रतिशत है।
कुल दो प्रतिशत कर माफ कर दिया गया है। कुल मिलाकर मंडी परिषद को सालाना 7.25 करोड़ का नुकसान उठाना होगा। वैसे भी फल व सब्जी आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नहीं आने से इन पर प्राईस कंट्रोल ऑर्डर लागू नहीं होता।
लेकिन अब मंडी शुल्क समाप्त होने के बाद फल व सब्जी के दामों में दस प्रतिशत तक गिरावट आनी चाहिए। इसी के लिए फल व सब्जी की सभी प्रजातियों को निर्दिष्ट वस्तुओं की सूची से बाहर करने की अधिसूचना जारी की गई।
होगी विधिक कार्रवाई
सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जिलों में इस बात की मॉनिटरिंग करे कि मंडी शुल्क हटाने के बाद फल व सब्जी के दामों में गिरावट आई है कि नहीं। यदि नहीं तो इसकी पड़ताल करते हुए विधिक कार्रवाई की जाए।
महंगाई को नियंत्रित करने के लिए यह फैसला लिया गया। एपीएमसी एक्ट से बाहर होने केसाथ ही फल व सब्जी के मूल्यों में गिरावट आएगी, जिसका फायदा आम आदमी को होगा और महंगाई कम होगी। चीजें सस्ती होनी चाहिए, इसकी मॉनिटरिंग का जिम्मा जिलाधिकारियों को दिया है। उनकी जिम्मेदारी होगी कि मंडी शुल्क मुक्त होने केबाद मूल्यों में गिरावट आए, यह सुनिश्चित हो।
- हरक सिंह रावत, कृषि मंत्री