फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा रुकी, 4500 से अधिक यात्री फंसे

Sat, 02 Jul 2016 05:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
भूस्खलन और मलबा आने से सड़कें ध्वस्त हो गई हैं। - फोटो : अमरउजाला
विज्ञापन
उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन के चलते सड़क पर मलबा आने से गंगोत्री-यमुनोत्री और बदरीनाथ यात्रा रोक दी गई है। जिसके चलते 4500 से अधिक यात्री फंसे हुए हैं।
विज्ञापन


शनिवार सुबह उत्तरकाशी में भारी बारिश के चलते गंगोत्री हाईवे 50 मीटर बह गया। जिसके चलते प्रशासन ने गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा रोक दी। भारी बारिश के चलते क्षेत्र के कई मकानों में दरार आ गई है।

वहीं गोपेश्वर में मलबा आने के चलते बदरीनाथ हाईवे और चमोली-ऊखीमठ-केदारनाथ मोटरमार्ग बंद होने से बदरीनाथ यात्रा रुक गई है। यात्रा मार्ग में लगभग 4600 यात्री वाहनों के साथ फंसे हुए हैं। प्रशासन यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटा हुआ है।
विज्ञापन


वहीं रास्ता बंद होने से गोपेश्वर, पीपलकोटी और जोशीमठ क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई ठप हो गई है। बीआरओ और लोकनिर्माण विभाग बदरीनाथ हाईवे को सुचारू करने में जुटे हुए हैं।

मलबे से सड़कें बहीं, आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई ठप

disaster in uttarakhand - फोटो : अमरउजाला
बारिश के कहर से कराह रहे उत्तराखंड के सामने अब नई मुश्किल सामने आई है। बारिश और भूस्खल के कई इलाकों में मोटरमार्ग ध्वस्त हो गए हैं। जिसके चलते आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई ठप हो गई है। बदरीनाथ हाईवे पर भी जगह-जगह मलबा आने से बाधित हो गया है।

शनिवार तड़के सुबह मलबा आने से चंबा-ऋषिकेश मोटर मार्ग बेमुंडा के पास मलबा आने से बंद हो गया। जिसके चलते नई टिहरी सहित कई इलाके तक आवागमन कई घंटे तक ठप रहा। जिसके चलते लोगों तक अखबार भी नहीं पहुंच पाए। दोपहर लगभग 11:30 बजे मार्ग खुलने के बाद आवागमन शुरू हुआ।

भारी बारिश के चलते घनसाली-घुत्तु मोटरमार्ग देवट गांव से आगे रानीगड़ के पास बंद हो गया है। मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए जिलाधिकारी टिहरी ने जनपद के सभी स्कूलों को सोमवार तक बंद करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन

नदियों ने बदले रास्ते, शोध में चौंकाने वाला खुलासा

रिवरबेड में जमाव से नदियों ने रास्ते बदल लिए हैं। - फोटो : amar ujala
बा‌रिश ने एक तरफ चमोली और पिथौरागढ़ में तबाही मचाई आई हैं वहीं विज्ञानियों के एक शोध ने उत्तराखंड में नई तबाही की आशंकाओं की ओर इशारा किया है। देहरादून स्थित वाडिया भू-संस्थान के वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा ने सिर्फ जन-धन की हानि ही नहीं पहुंचाई, बल्कि भौगोलिक स्थिति को भी प्रभावित किया।

मुख्य धारा पर मिट्टी, रेत-बजरी के जमाव से नदियों के रास्तों में बदलाव आ गया है। इस बदलाव नदियों के बेसिन का पूरा सिस्टम ही बदल रहा है। अपने मुख्य मार्ग से नदी की धार तेज बारिश में बेलगाम हो सकती है। नदियों की धारा के इस बदलाव से कटान के कारण नए भूस्खलन जोन पैदा हो गए, जिन्हें अभी चिन्हित नहीं किया गया। विज्ञानियों का कहना है कि तेज बारिश में यहां भूस्खलन जल्दी और अधिक हो सकता है।

आपदा के बाद यह बदलाव मंदाकिनी घाटी में अधिक आया है। मंदाकिनी और इसकी सहयोगी नदियों के रास्तों में बदलाव की पुष्टि हो चुकी है। मंदाकिनी नदी में सोनप्रयाग, सीतापुर, बांसबाड़ा, सियालसौड़ चंद्रपुरी, गबनी, गंगानगर, विजयनगर, रामपुर, तिलवाड़ा आदि स्थानों पर नदी की धारा अपने स्थान से खिसकी है।​

Published By: Vivek Singh
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें