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चारधाम यात्रा: अभी भी फंसे हैं हजारों श्रद्धालु

Sat, 27 Jun 2015 01:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग, गोपेश्वर
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लगातार बारिश से बेहाल गढ़वाल के लिए शुक्रवार की सुबह राहत बनकर आई। बारिश थम गई और दिनभर मौसम खुला रहा। रौद्र रूप धारण कर डरा रहीं नदियों में पानी घटा तो लोगों ने राहत की सांस ली।
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हालांकि बदरीनाथ, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा शुक्रवार को पूरी तरह ठप रही। केदारनाथ की यात्रा शनिवार को भी स्थगित रहेगी। खराब मौसम, रास्ता बंद होने और पुल-पुलिया बहने से पड़ावों पर और धामों में फंसे तीर्थयात्रियों को निकालने की कवायद दिनभर चलती रही।

पैदल रास्ते से और हेलीकॉप्टर के जरिये सैकड़ों यात्री निकाले गए, पर हजारों यात्री अब भी फंसे हैं। मलबा आने और सड़क का हिस्सा बहने से बंद बदरीनाथ हाईवे कंचन गंगा, रडांग बैंड और लामबगड़ में खुल गया है। लेकिन चमोली जिले के मारवाड़ी में हाईवे का करीब 30 मीटर हिस्सा बह जाने के कारण यहां वाहनों की आवाजाही नहीं हो पाई।
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यमुनोत्री धाम की यात्रा चलती रही। 900 यात्री यमुनोत्री गए। दोपहर बाद सुक्की में हाईवे खुलने पर ढाई सौ यात्री गंगोत्री भी पहुंचे। केदारनाथ की यात्रा रविवार को चलेगी या नहीं इस पर फैसला शनिवार को मौसम का हाल देखते हुए लिया जाएगा।

बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब मार्ग पर हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू

दो दिनों तक हुई बारिश के बाद शुक्रवार को बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब मार्ग पर फंसे लगभग 1300 तीर्थयात्रियों को निकाला गया। छह हेलीकॉप्टरों की मदद से 616 तीर्थयात्रियों को जोशीमठ पहुंचाया गया। करीब 300 तीर्थयात्री हेमकुंड साहिब के पैदल मार्ग से गोविंदघाट पहुंचे।

पचास वाहनों के जरिये भी चार सौ तीर्थयात्री निकाले गए हैं। हेमकुंड साहिब के दर्शन कर गोविंदघाट पहुंचे कई तीर्थयात्रियों ने मारवाड़ी तक की दूरी बदरीनाथ हाईवे से पैदल नापी। बदरीनाथ में अब भी लगभग चार हजार तीर्थयात्री रुके हुए हैं।

गोविंदघाट में एक हजार और घांघरिया में करीब तीन हजार तीर्थयात्री हैं। प्रशासन के मुताबिक घांघरिया में रुके यात्री लौटने के बजाय हेमकुंड साहिब जाना चाहते हैं। इससे पहले बृहस्पतिवार देर रात प्रशासन ने गोविंदघाट गुरुद्वारे के नदी किनारे वाले हिस्से को एहतियातन खाली करवा लिया था।

केदारधाम से सुरक्षित निकाले 954 यात्री

उधर, केदारनाथ धाम और पड़ावों पर रुके 954 यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। शुक्रवार तड़के 6 बजे से गुप्तकाशी से लेकर फाटा के बीच छह हेलीपैड से हेलीकॉप्टरों की मदद से केदारनाथ में रुके यात्रियों को लाने का काम शुरू किया गया। धाम से कुल 180 लोगों को हेलीकॉप्टर से गुप्तकाशी से फाटा के बीच विभिन्न हेलीपैड पर पहुंचाया गया, इनमें 112 तीर्थयात्री थे। 212 यात्री यहां से पैदल निकले।

इसके अलावा लिनचौली से 77, भीमबली से 85, जंगलचट्टी से 29 और गौरीकुंड से 369 यात्रियों को सोनप्रयाग के रास्ते सुरक्षित निकाला गया।

बृहस्पतिवार को मंदाकिनी नदी का पुल टूटने के कारण नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, एनडीआरएफ और पुलिस ने रस्सों की मदद से यात्रियों को करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला। केदारनाथ में अब निम, पुलिस और बीकेटीसी के ही लोग हैं। इनकी सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
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पुल बहने से पांच किमी बढ़ा केदारनाथ पैदल मार्ग

रविवार से केदारनाथ यात्रा चली तो अब यात्रियों को 21 किमी का पैदल सफर तय करना होगा। सोनप्रयाग से 500 मीटर आगे मंदाकिनी पर बने पुल के ध्वस्त होने से यहां से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है।

अब तक केदारनाथ जाने वाले यात्री सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक पांच किमी का सफर टैक्सी से तय करते थे। वहां से 16 किमी की यात्रा पैदल होती थी। अब यात्रियों को सोनप्रयाग से ही पैदल सफर तय करना होगा।

सीएम का है कहना
यात्रा पूरी तरह से सुरक्षित है। सरकार की पूरी तैयारी है और यात्रा जारी रहेगी। भारी बारिश से यात्रा कुछ समय के लिए बाधित रही, लेकिन किसी भी जगह से यात्रियों के स्तर पर सुरक्षा, संवाद और सुविधा की शिकायत नहीं आई। पुल और सड़क मार्ग को सोनप्रयाग और लामबगड़ में अधिक नुकसान हुआ है जो शनिवार सुबह तक दुरुस्त हो जाएंगे।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
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