चारधाम यात्रा का संचालन सुगम तरीके से हो, इसके लिए सड़कों को खुला रखना जरूरी है, लेकिन यात्रा मार्ग पर सक्रिय 40 से अधिक भूस्खलन क्षेत्र स्थानीय प्रशासन और सरकार के लिए चुनौती बनेंगे। शासन की मानें तो इन क्रॉनिक एक्टिव लैंड स्लाइड जोन के ट्रीटमेंट पर सौ करोड़ रुपये से अधिक बजट खर्च किया जा रहा है।
हालांकि यात्रा शुरू होने से पूर्व इनमें से ज्यादातर का काम पूरा नहीं हो पाएगा। उधर, गंगोत्री-यमुनोत्री मार्ग पर चिन्यालीसौड़ से लेकर धरासू बैंड तक हाईवे का काम कछुवा गति से चल रहा है। यहां सड़क बेहद जर्जर स्थिति में है। अगर यात्रा से पूर्व काम पूरा नहीं हुआ तो इसका सीधा असर चारधाम यात्रा पर पड़ेगा।
चारधाम मार्ग पर चिह्नित बड़े लैंडस्लाइड जोन
टिहरी में अटालीगंगा होटल के समीप, होटल ताज के निगट सिंगटाली, कौड़ियाला पानी गदेरा के निकट, महादेव चट्टी, तोताघाटी, तीनधारा, देवप्रयाग तहसील के निकट, मूल्यागांव, पौड़ी में फरासू और चमधार, रुद्रप्रयाग में जवाड़ी बाईपास के निकट, नरकोटा, सिरोबगड़, डीएफओ ऑफिस के निकट, बांसवाड़ा में दो जगह, काकड़ागाड़, सेमी बैंड, देवीधार, ब्यूंगाड़ खुमेरा, खुुमेरा (खाट), खाट, जामू, चंडिकाधार, कालाडूंगी, मुनकटिया, वाड़ा, चुन्नी बैंड, मस्तुरा, उत्तरकाशी में धरासू, छटांगा, सिलाई बैंड, ओजरी, खराड़ी, किसाला में दो जगह और पालीगाड़ में बेहद खतरनाक लैंडस्लाइड जोन सक्रिय हैं।