ये हैं बातचीत के कुछ अंश
अमर उजाला प्रतिनिधि : आप केदारनाथ के लिए हेली टिकट बुक करते हैं, मुझे भी श्रीकेदारनाथ धाम की यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर की बुकिंग करनी हैं।
ठग : हो जाएगी, मैं आईआरसीटीसी का ही अधिकारी बोल रहा हूं। सारे टिकट बुक हो चुके हैं। लेकिन 18 फीसदी हमारा अपना कोटा होता है। इसमें से टिकट मिल जाएंगे। कितने लोग हैं।
अमर उजाला प्रतिनिधि : सात लोग हैं।
ठग : सभी का नाम पता भेज दो। सभी का 27 हजार रुपये लगेगा। इसमें से 30 फीसदी अभी जमा करना होगा। बाकी यात्रा के समय। एक के बाद एक चार टिकट बनाकर मोबाइल पर भेज दिए गए।
अमर उजाला प्रतिनिधि : लेकिन, इतना कम कैसे। टिकट के तो ज्यादा पैसे हैं और जहां तक मुझे पता है ऐसी कोई व्यवस्था आईआरसीटीसी की नहीं है। यह सुनकर ठग ने फोन काट दिया और फिर फोन ही नहीं लगा।
ज्यादातर प्रदेश के बाहर के लोग हो रहे शिकार
फर्जी रजिस्ट्रेशन हो या फिर हेली टिकट का फर्जीवाड़ा। सभी मामलों में ज्यादातर ठगी के शिकार प्रदेश के बाहर के ही लोग हो रहे हैं। इसका कारण है कि प्रचार-प्रसार में कमी। प्रदेश के बाहर के लोगों में अब भी केदारनाथ व अन्य धामों की व्यवस्था के बारे में कम ही जानकारी है। यही नहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो किसी तरह जुगाड़ करने के चक्कर में जाल में फंस रहे हैं।
बचाव के लिए क्या करें
-आईआरसीटीसी की अधिकारिक वेबसाइट पर सर्च करें।
-आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर कोई भी मोबाइल नंबर नहीं है।
-फर्जी वेबसाइट पर मोबाइल नंबर लिखे होते हैं जो कि ठगों के होते हैं।
-सोशल मीडिया फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम आदि पर कोई टिकट बुकिंग की व्यवस्था नहीं है।
-किसी भी नंबर के संदिग्ध होने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें।
-साइबर वित्तीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
ये भी पढ़ें...Rishikesh: यूपी के जज के बेटे का रौब...पिता की कार लेकर ट्रैफिक नियम तोड़ता निकला, फिर पुलिस ने ऐसे सिखाया सब
एसटीएफ और साइबर पुलिस लगातार फर्जी वेबसाइट की निगरानी कर रही है। अपने फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया हैंडल से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जो शिकायतें आ रही हैं उनकी भी जांच की जा रही है। इस साल अब तक 20 फर्जी वेबसाइट ब्लॉक की जा चुकी हैं। यदि कोई ठगी का शिकार होता है या आशंका है तो साइबर वित्तीय हेल्पलाइन पर मदद मांग सकता है। एसटीएफ की ओर से मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं। - आयुष अग्रवाल, एसएसपी, एसटीएफ