826 किमी की इस परियोजना में 350 किमी का कार्य पूरा हो गया है। 124 किमी लंबे धरासू गंगोत्री के बीच 87 किमी मार्ग भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के कारण वन भूमि व नाप भूमि के अधिग्रहण के चलते लटका है। बैठक में केंद्रीय मंत्री गडकरी ने फॉरेस्ट क्लीयरेंस में देरी को लेकर नाराजगी जाहिर की। इस दौरान उन्होंने फॉरेस्ट विभाग के नोडल अफसर को फटकार भी लगाई। उन्होंने ताकीद किया कि चारधाम रोड पीएम नरेंद्र की एक महत्वकांक्षी परियोजना है।
सामरिक दृष्टि से भी अति महत्वपूर्ण है। इसे निर्धारित समय में पूरा करने के लिए तेजी से कार्य किए जाएं। राज्य एवं केंद्र स्तर पर भूमि अधिग्रहण, वन एवं पर्यावरण आदि की क्लीयरेंस के लंबित प्रकरणों को समयबद्धता के साथ निपटाया जाए। केंद्र एवं राज्य के अधिकारी आपसी समन्वय से काम करें। केंद्र एवं राज्य स्तर के संबंधित अधिकारी लगातार बैठकें आयोजित कर आपत्तियों का निस्तारण करें। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार चारधाम परियोजना के निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा करा रही है। कार्यों की लगातार समीक्षा हो रही है। बैठक में केंद्र, राज्य व बीआरओ के वरष्ठि अधिकारी भी शामिल हुए।
किसने क्या कहा
ऑलवेदर रोड सामरिक महत्व की पीएम की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसे समय पर पूरा करने के लिए तेजी से काम हों। भूमि अधिग्रहण, वन एवं पर्यावरण से जुड़े मामलों को समय से निपटाया जाए।
- नितिन गड़करी, केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री
परियोजना में वन एवं पर्यावरण की स्वीकृति के मामले सर्वोच्च प्राथमिकता से निपटाए जाएं। केंद्र और राज्य अधिकारी समन्वय बनाएं। नियमित बैठकें कर आपत्तियां का निपटारा करें।
- प्रकाश जावड़ेकर, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री
परियोजना सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। काम तेजी से पूरा करने के लिए केंद्र एवं राज्य के अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। सभी प्रकार की क्लीयरेंस एवं आपत्तियों का निस्तारण करना होगा।
- जनरल वीके सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को जोड़ने वाला सिंगल लेन मार्ग डबल लेन होगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के अनुरोध पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रोजेक्ट का डीपीआर बनाकर भेजने को कहा है। बैठक में सीएम ने बताया कि गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है। ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने से यातायात बढ़ने की संभावना है।
इसलिए नेशनल हाईवे-87 का चौड़ीकरण अपरिहार्य है। साथ ही एनएच 309-ए के टू-लेन होने से पिथौरागढ़, मुनस्यारी, डीडीहाट, गंगोलीहाट, चौकोड़ी बेरीनाग आदि पर्यटक स्थल जुड़ जाएंगे। इस मार्ग के 208 किमी लंबाई के इस भाग को दो लेन चौड़ीकरण के लिए डीपीआर एवं भूमि अधिग्रहण की स्वीकृति प्रदान की गई है। चौकोड़ी से अल्मोड़ा तक प्रथम चरण में कुल 126 किमी लंबाई की डीपीआर गठन की कार्रवाई चल रही है।
फाॅरेस्ट क्लीयरेंस से हल होंगी ये सात अड़चनें
1. धरासू बैंड से सिलक्यारा के बीच 15 किमी पर
2. ब्रह्मपुरी-कौड़ियाला के मध्य 33 किमी पर
3. रुद्रप्रयाग-कर्णप्रयाग के बीच 31 किमी तक
4. कर्णप्रयाग से 69 किमी मार्ग चौड़ीकरण
5. चमोली से हेलन 38 किमी मार्ग में
6. नालू पानी के पास लैंड स्लाइड ट्रीटमेंट
7. उत्तरकाशी राड़ी टॉप पर टनल निर्माण
13 में 5 काम इको सेंसिटिव जोन में
हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में भी चारधाम मार्ग के निर्माण के आसार दिखाई दे रहे हैं। परियोजना के यहां 13 कार्य लटके हैं, जिनमें से 5 कार्य इको सेंसिटिव जोन में हैं।