उत्तराखंड के चार धामों में से दो गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
विज्ञापन
इसी के साथ लगभग छह माह तक चलने वाली चारधाम यात्रा की विधिवत शुरुआत हो जाएगी।
जिला प्रशासन बुजुर्ग श्रद्धालुओं को एक धाम की यात्रा मुफ्त कराएगा। टैक्सी बुक कर बुजुर्ग केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमनोत्री, गंगोत्री, हेमकुंड और पिरान कलियर में से किसी भी एक धाम जा सकेंगे।
इस योजना का लाभ 65 साल से ऊपर के बुजुर्ग ही उठा पाएंगे। योजना के तहत पहले बुजुर्ग को जिला अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होगा।
आवेदन को जिलाधिकारी कार्यालय से संभागीय परिवहन कार्यालय भेजा जाएगा। जरूरी औपचारिकता पूरी होने के बाद एक कार्ड बुजुर्ग को जारी होगा। कोर्ड को लेकर बुजुर्ग को टैक्सी संचालक के पास जाना होगा।
विज्ञापन
वह आने-जाने का किराया कार्ड में लिख देगा। बुजुर्ग जिस भी धाम की यात्रा करता है वहां से कार्ड पर हस्ताक्षर कराने होंगे।
फिर वापस आकर कार्ड को आरटीओ कार्यालय में जमा करना होगा। कार्ड जमा होते ही बुजुर्ग के एकाउंट में विभाग रुपये जमा कर देगा।
उसके बाद टैक्सी संचालक को भुगतान किया जा सकता है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) संदीप सैनी ने बताया पूरी कार्यवाही में एक या दो दिन लगेंगे।
अब तक सिर्फ एक ग्रीन कार्ड
चारधाम यात्र के लिए भले ही शासन-प्रशासन सब ‘ओके’ बता रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
पिछले साल चारधाम के लिए दून से 1280 वाहनों के ग्रीन परमिट बने थे और इस बार केवल एक। हालांकि ऋषिकेश और हरिद्वार में ग्रीन कार्ड बने है, लेकिन संख्या बेहद कम है।
इस बार चारधाम यात्रा के लिए वाहन संचालकों ने कोई उत्साह नहीं दिखाया। पिछले साल की आपदा ने सबके मन में खौफ पैदा किया हुआ है। इस स्थिति से अधिकारी भी चिंतित है।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) राम प्रकाश राठौर ने बताया कि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
हरिद्वार से चारधाम के लिए पहला जत्था रवाना
हरिद्वार से चारधाम यात्रा के लिए बृहस्पतिवार को पहला जत्था रवाना किया गया। धर्मनगरी में ही पूजा अर्चना के बाद नौ वाहनों में 130 यात्रियों ने यात्रा के लिए कूच किया।
वहीं रेलवे स्टेशन हरिद्वार पर बृहस्पतिवार से ही चारधाम यात्रियों के लिए बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो गया। पहले दिन यहां छह यात्रियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
हरिद्वार ट्रेवल्स एजेंट टूर आपरेटर एसोसिएशन ने माया देवी मंदिर में पूजा अर्चना कर 10 दिनी चारधाम यात्रा के लिए टैक्सी-मैक्सी वाहनों का पहला जत्था रवाना किया।
एसोसिएशन के संरक्षक राकेश गोयल, भगवत शर्मा और संजय चोपड़ा ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर जत्थे को यमुनोत्री के लिए रवाना किया।
महामंत्री सुमित श्रीकुंज ने बताया कि एसोसिएशन ने पूजा अर्चना कर तीन टैंपो ट्रेवलर से 42 यात्रियों का जत्था भेजा है। इसके अलावा हरिद्वार से एक बस तथा पांच अन्य गाड़ियों से भी लोग चारधाम यात्रा पर गए हैं।
उन्होंने बताया कि पहले दिन कुल मिलाकर एक बस सहित नौ वाहन हरिद्वार से यात्रा के लिए गए हैं, जिनमें लगभग 130 यात्री सवार हैं।
उन्होंने बायोमेट्रिक पंजीकरण के लिए 15 केंद्र खोलने की मांग की है। अध्यक्ष उमेश पालीवाल ने प्रशासन पर यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ नहीं करने का आरोप लगाया है।
इस अवसर पर अरविंद खनेजा, अर्जुन सैनी, सुरेश ठाकुर, गोपाल प्रधान, विजय शुक्ल, चंद्रकांत शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किए।
मालूम हो कि पर्यटन विभाग ने यात्रा पंजीकरण की जिम्मेदारी प्राइवेट एजेंसी त्रिलोक सिक्योरिटी सिस्टम त्रिपुरा को दी है। एजेंसी के अधिकारी श्रीनिवास ने बताया कि हरिद्वार में पहले दिन छह रजिस्ट्रेशन हुए हैं।
वह पंजीकरण कराने वाले यात्रियों की डिटेल नहीं बता सके।
पर्यटन अधिकारी अंजान भले ही हरिद्वार में बृहस्पतिवार से बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया, लेकिन पर्यटन अधिकारी इससे अंजान रहे।
उन्हें यह भी जानकारी नहीं थी कि पहले दिन कितने रजिस्ट्रेशन हुए। इस संबंध में जिला पर्यटन अधिकारी केएस रावत ने बताया कि शुक्रवार से यात्रा पंजीकरण की सूचना देने की व्यवस्था कर ली जाएगी।
कोशिशों के बावजूद बहुत कुछ ‘भगवान भरोसे’
चारधाम यात्रा का आगाज शुक्रवार से होने जा रहा है, लेकिन उत्तरकाशी में तैयारियां आधी अधूरी ही हैं। हाल यह है कि जून 13 में आई आपदा के बाद बदहाल गंगोत्री हाईवे आज तक दुरुस्त नहीं हो पाया।
यही नहीं, धाम में अभी तक बिजली-संचार सेवा ठप है। आधे हिस्से में पानी की किल्लत बनी हुई है। हालांकि एक दिन पहले धाम पहुंचे अधिकारियों का दावा है कि व्यवस्थाएं शीघ्र दुरुस्त कर ली जाएंगी।
बात सिर्फ गंगोत्री की नहीं है, यमुनोत्री धाम पहुंचने में कई दुश्वारियां हैं। बड़कोट से फुलचट्टी तक कहीं भी शौचालय नहीं है। यात्रा मार्ग के कई हैंडपंप बंद पड़े हैं।
छाटांगा, बाडिया और जंगलचट्टी में हाईवे पर डेंजर जोन बना हुआ है। हाईवे पर कई जगह डामरीकरण कार्य तो चल रहा है, लेकिन वह उखड़ना भी शुरू हो गया है।
शायद यही कारण है कि डंडी-कंडी और घोड़े-खच्चर वालों में भी यात्रा को लेकर कोई उत्साह नहीं है। केदारनाथ धाम जाने में तो और भी दिक्कतें हैं।
आपदा के दौरान रखी गई बल्लियों से पार करनी होगी नदी
धाम में सरस्वती नदी में अस्थायी झूला पुल का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ। आपदा के बाद गत वर्ष लोनिवि ने सरस्वती नदी को पार करने के लिए अस्थायी पुल का निर्माण किया था।
लेकिन कपाट बंद होने के बाद दोनों पुलों को खोल दिया गया था। इस वर्ष लोनिवि ने यहां अभी तक पुल का निर्माण नहीं किया था। यहां काम कर रहे मजदूर और कर्मचारी आपदा के दौरान रखी गई बल्लियों से नदी पार कर रहे हैं।
यही नहीं केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का डामरीकरण आज तक नहीं हो सका। अब भी 40 किलोमीटर का डामरीकरण होना बाकी है।
बदरीनाथ में भी सरकारी बदइंतजामी तमाम तरह की दुश्वारी प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों को पीछे छोड़कर चार धामों में सर्वश्रेष्ठ बदरीनाथ धाम तीर्थयात्रियों के स्वागत के लिए बिल्कुल तैयार है।
यात्रा सीजन पर अपनी आर्थिकी चलाने वाले युवा व स्थानीय व्यवसायी धाम में पहुंचकर अपने प्रतिष्ठानों को सजाने में जुट गए हैं। बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा की तैयारियों को देखने अमर उजाला टीम बृहस्पतिवार को बदरीनाथ धाम पहुंची।
वहीं बदरीनाथ धाम में तो रौनक लौट आई है, लेकिन मार्ग की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लामबगड़ में बीआरओ ने चट्टान काटकर करीब दो सौ मीटर सड़क का निर्माण किया है।
यहां पर हाईवे संकरा होने के कारण बीआरओ के कर्मचारी हरी और लाल झंडियां लेकर वाहनों की आवाजाही करवाएंगे।
कंचन गंगा और दूध गंगा में हाईवे गदेरे में तब्दील हो गया है। जिससे यात्रा वाहनों को गुजरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।