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Char dham Yatra: सावधान! चारधाम श्रद्धालुओं को कंगाल करने के लिए ठग बुन रहे मायाजाल, अपना रहे ये तरीका

Sun, 31 May 2026 01:01 PM IST
Alka Tyagi अंकित सिंह, अमर उजाला, देहरादून

सार

साइबर ठग आईआरसीटीसी की असली वेबसाइट से मिलते-जुलते यूआरएल बनाकर और वीआईपी दर्शन व कन्फर्म टिकट का झांसा देकर धोखाधड़ी कर रहे हैं।
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- फोटो : FREEPIK
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विस्तार
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चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को हेलिकॉप्टर टिकट और वीआईपी दर्शन का झांसा देकर ठगने वाले बड़े संगठित साइबर गिरोह का उत्तराखंड एसटीएफ ने पर्दाफाश किया है। करीब डेढ़ महीने तक लगातार डिजिटल निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और साइबर ट्रेल खंगालने के बाद एसटीएफ ने बिहार के नालंदा जिले से गिरोह के दो मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया।

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एसटीएफ की चारधाम यात्रा एंटी हेली फ्रॉड सेल ने जांच के दौरान 143 संदिग्ध यूआरएल, फर्जी वेबसाइटों और 27 व्हाट्सएप नंबरों की पड़ताल की। एसटीएफ की एंटी हेली फ्रॉड सेल चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को ठगी से बचाने के लिए अब तक 300 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया लिंक और 100 से ज्यादा संदिग्ध व्हाट्सएप नंबरों को ब्लॉक करा चुकी है।

साइबर ठग आईआरसीटीसी की असली वेबसाइट से मिलते-जुलते यूआरएल बनाकर और वीआईपी दर्शन व कन्फर्म टिकट का झांसा देकर धोखाधड़ी कर रहे थे। 134 से अधिक मामले भी दर्ज किए हैं। ठग गूगल सर्च पर फर्जी विज्ञापन चलाते हैं जिससे उनकी नकली वेबसाइट सबसे ऊपर दिखाई देती है। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल या मैसेज के जरिये फर्जी क्यूआर कोड भेजकर पैसे ऐंठते हैं। साइबर पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल हो रहे कई अवैध बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को भी फ्रीज किया है।
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अपराध करने का तरीका

- ठग खुद को अधिकृत हेली सेवा प्रदाता या एजेंट बताकर फर्जी नंबर, फर्जी सोशल मीडिया पेज व फर्जी बेबसाइबट संचालित करते थे।
- सोशल मीडिया एवं मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रद्धालुओं को टारगेट किया जाता था।
- वीआईपी दर्शन, तुरंत कन्फर्म टिकट, सीमित सीट जैसे झूठे प्रलोभन देकर विश्वास में लिया जाता था।
- विभिन्न व्यक्तियों के बैंक खाते खुलवाकर उन्हें म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
- ठगी की धनराशि इन खातों में ट्रांसफर कर एटीएम के माध्यम से निकासी की जाती थी।
- गिरोह के सदस्यों के बीच 15 से 25 प्रतिशत तक कमीशन का बंटवारा किया जाता था।

एनसीआरपी शिकायतों से जुड़े मिले बैंक खाते

जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों पर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) में कई शिकायतें दर्ज मिलीं। व्हाट्सएप चैट्स से बैंक खाते, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोड के आदान-प्रदान के प्रमाण भी मिले हैं। पुलिस का मानना है कि गिरोह कई राज्यों में सक्रिय है और इसके अन्य सदस्य अभी फरार हैं।

श्रद्धालुओं को हेलिकॉप्टर बुकिंग केवल आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही करना चाहिए। किसी भी अनजान लिंक, सोशल मीडिया पेज या व्हाट्सएप नंबर के झांसे में न आएं। साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
- अजय सिंह, एसएसपी, एसटीएफ
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