चारधाम यात्रा में श्रद्वालुओं की बढ़ती संख्या और अव्यवस्थाओं के समाधान के लिए एसडीसी फाउंडेशन की ओर से संवाद कार्यक्रम हुआ। जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के जानकारों ने सुझाव दिया कि प्रदेश सरकार को यात्रा प्रबंधन के लिए बड़े दावे करने की बजाय बुनियादी सुविधाओं पर काम करने की जरूरत है।
एसडीसी फाउंडेशन के अनूप नौटियाल ने कहा कि छह माह की चारधाम यात्रा को व्यवस्थित करने के लिए प्रदेश सरकार को छह प्रमुख बिंदुओं पर कार्य करने की जरूरत है। यात्रा की रणनीति, प्रबंधन, सुरक्षा, पर्यावरण, भीड़ प्रबंधन और अर्थव्यवस्था के अलग-अलग पहलुओं को एकीकृत की आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यात्रा के दौरान धामों की धारण क्षमता पर सवाल उठाए।
चारधाम समेत यात्रा मार्ग पर मेडिकल सुविधा नाकाफी
जियोलॉजी और पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. एसपी सती ने कहा, यात्रा प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र और मजबूत संगठन बनाया जाना जरूरी है। यात्रा में बढ़ती भीड़ से पर्यावरण पर भी संकट गहरा रहा है। धामों के वैज्ञानिक तौर तरीकों से धारण क्षमता का अनुपालन आवश्यक है।
एम्स ऋषिकेश के फिजियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. लतिका मोहन ने चारधाम यात्रा में स्वास्थ्य संबंधी विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि तमाम विशेषज्ञों की राय के बावजूद सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में सेवाएं दे चुके एम्स ऋषिकेश के डॉ. श्रीकांत ने कहा कि चारधाम समेत यात्रा मार्ग पर मेडिकल सुविधा नाकाफी है।
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श्रीनगर मेडिकल कॉलेज महज रेफर सेंटर बनकर रह गया है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार प्रसार और एंबुलेंस सेवा को मजबूत बनाने का सुझाव दिया। पब्लिक पाॅलिसी विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप मेहता ने बताया यात्रा प्रबंधन को लेकर पॉलिसी डॉक्यूमेंट तैयार कर सरकार को सौंप गया। लेकिन इस पर अभी तक अमल नहीं हुआ है। मेजर राहुल जुगरान ने कहा कि सरकार की मुख्य प्राथमिकता चारधाम यात्रा का प्रबंधन होना चाहिए।