क्या कहते हैं ग्रामीण
मेरी उम्र 35 वर्ष हो चुकी है। होश संभालने के बाद से आज तक मैं सिर्फ सिर पर पानी ही ढो रहा हूं। जल संस्थान के अधिकारियों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। गांव में पांच-छह दिन में एक बार ही पानी आता है। इसी पानी के संकट ने हमारे गांव को उजाड़ दिया और लोग पलायन को मजबूर हो गए।
- नवीन पुरोहित ग्रामीण
18 साल की उम्र में शादी होकर इस गांव में आई थी। आज मेरी उम्र 75 वर्ष हो चुकी है। जीवन के 57 साल सिर्फ पानी के इंतजार और उसे ढोने में बीत गए। आज भी इस ढलती उम्र में जल स्रोतों से पानी ढोना पड़ता है। हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
- कमला देवी ग्रामीण।
जल जीवन के तहत बनने वाली योजना में पहले गांव नगर पालिका क्षेत्र में शामिल था जिससे गांव में जल जीवन मिशन योजना का लाभनहीं मिल पाया। वहीं अब गांव ग्राम सभा में शामिल हो गया है। गांव के स्रोत में पानी घट चुका है। वहीं अब दो-दो दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। साथ ही टैंकर की भी व्यवस्था की जा रही है।
- संजय सिन्हा, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान पोखरी।