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Chamoli: सेमी गांव में दशकों से पानी ढोते-ढोते बीत गई ग्रामीणों की जिंदगी, रिश्ते भी मुरझाने लगे, किया पलायन

Sun, 05 Jul 2026 01:34 PM IST
Alka Tyagi दीपक कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, कर्णप्रयाग

सार

एक दशक पहले सेमी गांव में 50 से अधिक परिवार रहते थे। मगर पानी की कमी के कारण करीब 28 से अधिक परिवार पलायन कर गए हैं। अब गांव में केवल बुजुर्ग, महिलाएं और कुछ युवा ही बचे हैं।
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सेमी गांव में पानी की परेशानी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पोखरी ब्लॉक स्थित सेमी गांव में दशकों से पानी की गंभीर समस्या बनी है। इस कारण पिछले कुछ वर्षों में गांव से अब तक करीब 28 से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं। स्थिति यह है कि गांव आने वाले रिश्तेदार पहले गांव में पानी की उपलब्धता के बारे में पूछते हैं। पानी की किल्लत पर वह गांव आने से मना कर देते हैं। वहीं कई लोगों का कहना है कि गांव में कभी भी सुचारु पेयजल आपूर्ति नहीं होती। ऐसे में पूरा जीवन ही पानी भरने में बीत गया। गांव की पुरानी लाइन होने के कारण बार-बार क्षतिग्रस्त होती रही है।

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स्रोत पर पानी भी कम रहता है। सेमी के लिए बेडगुंडा और तुंगनाथ के आसपास जलस्रोतों से पानी की आपूर्ति होती है। इस योजना से खासखाल, ब्रह्मखाल और सरमोला सहित चार गांवों को पानी मिलता है। मगर सेमी अंतिम गांव होने के कारण यहां पानी की सुचारु आपूर्ति नहीं हो पाती।

ग्रामीणों का कहना है कि बचपन से लेकर अब तक पानी ढो रहे हैं। रिश्तेदार गांव आने से पहले पानी की उपलब्धता के बारे में पूछते हैं। पानी न होने पर वे आने से मना कर देते हैं। समस्या के समाधान के लिए जल संस्थान के अधिकारियों को कई बार सूचित करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
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क्या कहते हैं ग्रामीण

मेरी उम्र 35 वर्ष हो चुकी है। होश संभालने के बाद से आज तक मैं सिर्फ सिर पर पानी ही ढो रहा हूं। जल संस्थान के अधिकारियों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। गांव में पांच-छह दिन में एक बार ही पानी आता है। इसी पानी के संकट ने हमारे गांव को उजाड़ दिया और लोग पलायन को मजबूर हो गए। 
- नवीन पुरोहित ग्रामीण

18 साल की उम्र में शादी होकर इस गांव में आई थी। आज मेरी उम्र 75 वर्ष हो चुकी है। जीवन के 57 साल सिर्फ पानी के इंतजार और उसे ढोने में बीत गए। आज भी इस ढलती उम्र में जल स्रोतों से पानी ढोना पड़ता है। हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
-  कमला देवी ग्रामीण।

जल जीवन के तहत बनने वाली योजना में पहले गांव नगर पालिका क्षेत्र में शामिल था जिससे गांव में जल जीवन मिशन योजना का लाभनहीं मिल पाया। वहीं अब गांव ग्राम सभा में शामिल हो गया है। गांव के स्रोत में पानी घट चुका है। वहीं अब दो-दो दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। साथ ही टैंकर की भी व्यवस्था की जा रही है। 
- संजय सिन्हा, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान पोखरी।
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