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Chamoli Accident: पेयजल निगम ने प्लांट बनाने वाली कंपनी की जांच की शुरू, अनदेखी मानी जा रही हादसे की वजह

Mon, 24 Jul 2023 02:19 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

कंपनी के ठेके की शर्तों में प्लांट की मॉनिटरिंग, मेंटिनेंस से जुड़े क्या प्रावधान शामिल थे। बताया जा रहा है कि कंपनी को 15 साल तक इसका मेंटिनेंस देखना था, जिसकी सूचना प्लांट संचालित करने वाली संस्था के माध्यम से दी जानी थी। निगम के एमडी एससी पंत का कहना है कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है।
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एसटीपी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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चमोली के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में हादसे के बाद अब पेयजल निगम के एमडी ने इसका निर्माण करने वाली कंपनी के ठेके से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। इनका परीक्षण किया जाएगा। बताया जा रहा है कि निर्माण करने के बाद कंपनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है।

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पेयजल निगम ने 2017 में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का ठेका कंपनी को दिया था। कंपनी ने 2019 में इसे तैयार किया था। 2021 से इसके संचालन की जिम्मेदारी जल संस्थान को सौंप दी गई थी। इस प्लांट में हादसा होने के बाद अब सभी पहलुओं पर इसकी जांच की जा रही है। पेयजल निगम के एमडी एससी पंत ने बताया कि नमामि गंगे के अधिकारियों से इस कंपनी के ठेके के कागज मांगे गए हैं।

ये देखा जाएगा कि कंपनी के ठेके की शर्तों में प्लांट की मॉनिटरिंग, मेंटिनेंस से जुड़े क्या प्रावधान शामिल थे। बताया जा रहा है कि कंपनी को 15 साल तक इसका मेंटिनेंस देखना था, जिसकी सूचना प्लांट संचालित करने वाली संस्था के माध्यम से दी जानी थी। निगम के एमडी एससी पंत का कहना है कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है।

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शर्तों के उल्लंघन पर अलग से कार्रवाई होगी

पेयजल निगम के एमडी एससी पंत का कहना है कि अगर कंपनी ने शर्तों का उल्लंघन किया होगा तो नियमानुसार जुर्माना से लेकर विधिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह प्लांट के निर्माण संबंधी जांच पूरी हो जाएगी।

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टिनशेड के डिजाइन पर भी सवाल

पेयजल निगम ने चमोली, गोपेश्वर व कर्णप्रयाग में जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनवाए हैं, उनका ढांचा टिनशेड का है। इस ढांचे को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि इन जगहों पर बड़ी जमीन न मिलने की वजह से नदियों किनारे प्लांट बनाए गए थे। चूंकि इन किनारों को भूस्खलन जोन कहा जाता है, इसलिए बड़ा स्ट्रक्चर यहां सुरक्षित नहीं था। आईआईटी रुड़की से ढांचा एप्रूव करने के बाद ही इनका निर्माण किया गया है।

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