कनासर से शुरू होता है ट्रैक
यह ट्रैक कनासर-देववन से शुरू होता है। इसके बाद देववन से मुंडाली, कठियान, शंकुधारी, बुधेर, जाख, नाडा, कुनैन, कुडोग, दारागाड़ आदि स्थानों से गुजरते हुए ठडियार में समाप्त होता है। इस बीच ट्रैकर्स जंगल ट्रैक के साथ ही इन गांवों की संस्कृति, सभ्यता और खानपान से रूबरू होते हुए आगे बढ़ सकते हैं। इस ट्रैक के एक अन्य भाग से रिखनाड़ रेंज के नाडा वन क्षेत्र, खडंबा हाेते हुए ठडियार तक पहुंचा जा सकता है।
वन विभाग का होमवर्क पूरा, शासन की हरी झंडी का इंतजार
वन विभाग की ओर से ट्रैक को पुनर्जीवित करने को लेकर होमवर्क पूरा कर लिया गया है। अब शासन की हरी झंडी का इंतजार है। इस प्रोजेक्ट के तहत ट्रैक को विकसित करने के साथ ही जंगल के भीतर चिह्नित स्थानों पर सौर ऊर्जा लाइट, ईको टूरिज्म विकास एवं नेचर कैंप की स्थापना, साइनेज लगाना, आधारधूत सुविधाओं जैसे पानी, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन आदि सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
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प्रकृति आधारित पर्यटन को आगे बढ़ाते हुए वन विभाग ने अपना एक्शन प्लान तैयार कर शासन को सौंप दिया है। 60 किमी के इस ट्रैक के विकसित होन से जहां सरकार की आय बढ़ेगी, वहीं स्थानीय समुदाय की आजीविका में भी सुधार होगा। अर्जित आय का 80 प्रतिशत लाभ स्थानीय आबादी, जबकि 20 प्रतिशत लाभ सरकार के खाते में जाएगा। ईको टूरिज्म के तहत यह बेहद महत्वपूर्ण योजना है, जिसे शीघ्र मंजूरी मिलने की उम्मीद है। - डॉ. विनय भार्गव, वन संरक्षक यमुना वृत्त