केंद्र के सौतेले व्यवहार की शिकायत कर रही उत्तराखंड सरकार को नमामि गंगे के तहत केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती का सहयोग तो मिला पर आधा-अधूरा।
अर्द्धकुंभ के तहत प्रदेश सरकार केंद्र से 500 करोड़ रुपए की विशेष सहायता की मांग कर रही है। प्रधानमंत्री के सामने इस मुद्दे को उठाने के बाद भी यह मांग पूरी नहीं हो पाई है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती केदारनाथ में निर्माण कार्य की तारीफ कर ही चुकी हैं।
अब नमामि गंगे के तहत अर्द्धकुंभ में हर संभव सहयोग करने का उनका आश्वासन प्रदेश सरकार को रुचिकर लग सकता है पर हकीकत में यह मुश्किल आसान करने वाला नहीं है। अर्द्धकुंभ के लिए प्रदेश सरकार अपने स्तर से 200 करोड़ रुपए की व्यवस्था बजट के जरिये कर चुकी है। कुल मिलाकर 500 करोड़ रुपए की दरकार है।
पिछले कुंभ आयोजन को लेकर हुए विवादों को देखते हुए कोशिश इस बात की भी है कि अधिकतर निर्माण कार्य स्थायी प्रकृति के हों। ऐसे में 500 करोड़ रुपए प्रदेश सरकार तुरंत ही मांग रही है। आयोजन के लिए कुछ ही माह का समय बचा है।
दूसरी और केदारनाथ में घाटों का निर्माण का प्रबंधन सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई (पीएसयू) से करने से प्रदेश सरकार राहत जरूर महसूस कर सकती है।
इस काम को नेहरू इंस्टीट्यूट आफ माउंटेनिंग (निम) कर ही रहा है और प्रदेश सरकार ने पहले यह काम केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के उपक्रम वापकोष को देने का मन भी बनाया था।
निम की विशेषज्ञता को देखते हुए उससे यह काम नहीं छीना गया। जगजीतपुर हरिद्वार में 40 एमएलडी की अतिरिक्त सृजन क्षमता के एसटीपी प्लांट के लिए 71 करोड़ और चंडीघाट के पास नए घाट के लिए करीब 55 करोड़ की स्वीकृति मिलने से राज्य सरकार को राहत मिलेगी।