इस परियोजना के लिए दोहरी खुशी की बात ये भी है कि प्रदेश सरकार को 25 सौ करोड़ से अधिक की धनराशि जुटाने में हाथ पसारने से भी निजात मिल सकती है। शासन के मुताबिक फंडिंग के लिए एशियन इंफ्रास्ट्रकचर इन्वेस्टमेंट बैंक की ओर से स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है।
राज्य की ओर से केंद्र को पहले ही तृतीय पक्ष से फंडिंग का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। फंडिंग कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की ओर से संयुक्त रूप से केंद्र सरकार को परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
एक नजर में परियोजना
कुल लागत 2584 करोड़
तकनीकी स्वीकृति 11 फरवरी 2019 को केंद्रीय जल आयोग ने प्रदान की
डूब क्षेत्र के लिए भूमि 351 हेक्टेयर, प्राप्त की जा चुकी है
वन स्टेज - 2 अनुमति प्राप्त, 89 करोड़ रुपये जारी
अन्य स्वीकृतियां केंद्र के 17 विभागों से हासिल हो चुकी है
अब इस महत्वपूर्ण परियोजना के काम में और तेजी आएगी। 40 से भी अधिक वर्षों के इंतजार के बाद भाबर के लोगों के सपना सच होगा। दशकों से लटकी पड़ी जमरानी बांध परियोजना को हकीकत बनाने के लिए हमारी सरकार ने गंभीरता से कोशिश की। इसमें केंद्र सरकार की भी पूरा सहयोग मिला, जिसके लिए हम उनके आभारी हैं।
-मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
यह उत्तराखंड की बेहद महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके लिए लगातार प्रयास किया जा रहे थे। कोशिश है कि परियोजना को अब तेजी से आगे बढ़ाया जाए। परियोजना पूरी होने पर कुमाऊं के हल्द्वानी को पेयजल मिल सकेगा। इसके साथ ही सिंचाई के लिए उत्तर प्रदेश और हल्द्वानी के आसपास के क्षेत्रों को पानी मिलेगा। इसमें बिजली का उत्पादन भी होगा।
- भूपेंद्र कौर औलख, सचिव सिंचाई
पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने का मतलब है कि परियोजना की अंतिम बाधा भी दूर हो गई है। अब निर्माण का काम शुरू किया जा सकता है। वन स्टेज टू की स्वीकृति पहले ही मिल गई थी। यह बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
- एसएस नेगी, अध्यक्ष, एसईआईएए