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उत्तराखंड: देश में पहली बार डीएनए से कराई गई हाथियों की गणना, गोबर से तैयार की गई प्रोफाइल रिपोर्ट

Fri, 22 Sep 2023 12:10 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

भारतीय वन्यजीव संस्थान में 34वें वार्षिक शोध कार्यशाला में निदेशक वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि वन्यजीव संस्थान लगातार हाथियों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। इनकी सही संख्या पता लगाने के लिए पूरे देश में डीएनए आधारित गणना कराई गई है।
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World Elephant Day 2023 - फोटो : wildlife sos
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विस्तार
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देश में पहली बार हाथियों की गणना डीएनए सैंपल के जरिये कराई गई है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने देश के सभी अभयारण्यों में इस गणना के काम को पूरा किया है। हाथी के गोबर से डीएनए सैंपल लेकर कैमरा ट्रैप का प्रयोग गणना के लिए किया गया है।

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गणना की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई है। इसे जल्द केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय जारी करेगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान में 34वें वार्षिक शोध कार्यशाला में निदेशक वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि वन्यजीव संस्थान लगातार हाथियों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है।

इनकी सही संख्या पता लगाने के लिए पूरे देश में डीएनए आधारित गणना कराई गई है। पहले ब्लाक काउंट के आधार पर हाथियों को गिना जाता था, इसमें कई बार सटीक संख्या पता नहीं चल पाती थी। इसलिए गणना के प्रचलित पांच-छह तरीकों में डीएनए आधारित गणना को चुना गया।
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डीएनए प्रोफाइल बताएगी हाथियों की प्रजाति और उम्र

प्रोजेक्ट एलीफेंट के 30 वर्ष पूरे होने पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने हाथियों के संरक्षण के मद्देनजर हाथियों की डीएनए (डीऑक्सी राइबोन्यूक्लिक एसिड) प्रोफाइलिंग की घोषणा की। वर्ष 2017 में हाथियों की संख्या 29, 964 दर्ज की गई थी। अब डीएनए आधारित गणना में पहले बेसलाइन सर्वे हुआ फिर गोबर का सैंपल लिया गया। कैमरा ट्रैप से हाथियों की संख्या का पता लगाया गया। डीएनए प्रोफाइलिंग में हाथियों की प्रजाति और संभावित उम्र के साथ ही उसके बारे में कई अन्य जानकारियां भी दी गई हैं।

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हाथियों की तस्करी रोकने में मिलेगी मदद

निदेशक विरेंद्र तिवारी ने बताया कि डीएनए प्रोफाइलिंग से हाथियों के कॉरिडोर को पहचानने और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में भी मदद की उम्मीद है। आसाम और केरल समेत कई राज्यों में मंदिरों और संस्थाओं के पास करीब 1000 हाथी हैं, प्रोफाइलिंग से ऐसे हाथियों की जानकारी जुटाई जा सकेगी। इसके साथ ही हाथियों की तस्करी को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।

पहली बार हो रही डीएनए आधारित गणना में डीएनए प्रोफाइलिंग के परिणामों का मिलान रिजर्व फॉरेस्ट में लगे कैमरों से भी कराया गया है, ताकि सटीक गणना प्राप्त हो सके। डीएनए प्रोफाइल से हाथियों के बारे में कई जानकारियां जुटाई जा सकेंगी। उनके व्यवहार को जानने और संरक्षण में मदद मिलेगी। गोबर से हुई डीएनए प्रोफाइलिंग का विश्लेषण शोध के लिए किया जाएगा। -विरेंद्र तिवारी, निदेशक, भारतीय वन्यजीव संस्थान

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