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मेरठ और रामपुर के कारोबारियों पर सीबीआई ने दर्ज किए मुकदमे

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बैंकों से लोन लेकर धोखाधड़ी करने के आरोप में सीबीआई ने रामपुर और मेरठ के कारोबारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं। इनमें एक मामला 21 करोड़ की धोखाधड़ी का है तो दूसरा तीन करोड़ रुपये की जालसाजी से जुड़ा है। आरोप है कि इन्होंने लोन लेने के लिए जो प्रॉपर्टी बैंक में दर्शायी वह इनके नाम पर ही नहीं है। या इसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है।
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पहले मामले की शिकायत सीबीआई की गाजियाबाद शाखा को बैंक ऑफ इंडिया मेरठ ब्रांच के चीफ मैनेजर आशीष अग्रवाल ने की है। उनका कहना है कि मैसर्स महावीर फार्जिंग प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटर्स और गारंटरों ने बैंक से धोखाधड़ी की है। उन्होंने वर्ष 2014 में 21 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिमिट ली थी। इसके जरिए यह अपना कारोबार कर रहे थे। लेकिन, बीच में पैसा नहीं चुकाया गया। जांच की गई तो पता चला कि उन्होंने इसके सापेक्ष जो संपत्तियां गिरवी रखी थीं। उनके कागजात फर्जी लगाए गए हैं। इनमें से कुछ कागजात में फर्जी तरीके से कीमत बढ़ाकर दर्शायी गई है। इस शिकायत के आधार पर सीबीआई देहरादून शाखा में कंपनी के मुकुल जैन और उनकी पत्नी प्रियंका जैन निवासी पंजाबी पुरा, दिल्ली रोड, मेरठ, उनकी कंपनी महावीर फोर्जिंग प्राइवेट लिमिटेड मेरठ, आर्शे इंटरप्राइजेज (इसकी मालिक प्रियंका जैन हैं।) और एक सरकारी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
पीएनबी के साथ रामपुर के कारोबारियों ने की धोखाधड़ी
पीएनबी चंद्र नगर के मैनेजर नीरज निर्निमेश ने भी सीबीआई को शिकायत की है। उनके अनुसार रामपुर के कारोबारी नरगिस बिलाल और मुसर्रत अली निवासी सिविल लाइन रामपुर ने बैंक से फर्जी तरीके से तीन करोड़ रुपये का लोन लिया था। आरोप है कि इसमें उनके साथ कुछ सरकारी कर्मचारी भी मिले हुए थे। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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