फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साईं को भगवान न मानने पर शंकराचार्य स्वरूपानंद पर शिरडी में केस

Thu, 30 Jun 2016 09:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • स्वरूपानंद बोले, दुर्भावना से दर्ज किया गया मुकदमा
  • हैदराबाद निवासी व्यक्ति की ओर से शंकराचार्य को शास्त्रार्थ की भी दी चुनौती
  • शंकराचार्य ने भेजा शिष्य, लेकिन शिरड़ी प्रशासन ने लगायी धारा-144
  • विरोध में शिरड़ी ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी, एसएसपी को भेजा नोटिस
विज्ञापन
शंकराचार्य स्वरूपानंद - फोटो : gettyimages
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

साईं को भगवान न मानने पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती पर शिरडी (महाराष्ट्र) में शिरडी ट्रस्ट की ओर से मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही हैदराबाद निवासी एक व्यक्ति की ओर से शंकराचार्य को शास्त्रार्थ के लिए दी चुनौती पर भेजे गए शिष्य को प्रशासन की ओर से रोकने पर शंकराचार्य ने एतराज जताया है।
विज्ञापन


इसके विरोध में बुधवार को उन्होंने अहमदनगर जनपद (महाराष्ट्र) के एसएसपी, शिरडी डिवीजन के एसडीएम, शिरडी ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी को नोटिस भेजा है।

बुधवार को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने बताया कि 24 अगस्त 2014 को उज्जैन में हुई धर्म संसद में साईं को भगवान न मानने का प्रस्ताव पारित किया गया था। उस समय धर्म संसद में 13 अखाड़ों के महामंडलेश्वर, चार मठों के शंकराचार्य, काशी विद्या परिषद से जुड़े गणमान्य समेत कई साधु-संत मौजूद थे। लेकिन मुकदमा उनके खिलाफ ही दर्ज किया गया है। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा दुर्भावना से किया गया है।
विज्ञापन

शंकराचार्य ने स्वीकारी शास्त्रार्थ की चुनौती, शिष्य को भेजा शिरडी

शंकराचार्य स्वरूपानंद - फोटो : gettyimages
इसके अलावा उन्होंने अपने को शास्त्रार्थ के लिए चुनौती देने वाले हैदराबाद निवासी रमनानंद व्यक्ति से शास्त्रार्थ करने के लिए मंगलवार रात अपने शिष्य गोपिदानंद को शिरडी के लिए रवाना किया। लेकिन वहां के प्रशासन ने शिष्य के पहुंचने से पहले ही धारा 144 लगा दी है।

इस पर उन्होंने सवाल उठाया कि एक आदमी के पहुंचने पर धारा-144 लगाने का क्या औचित्य है। शंकराचार्य ने कहा कि गोपिदानंद निहत्थे गए हैं। अपने देश में सनातन धर्म को हाशिए पर लाने का काम अब लगातार होने लगा है। जब भी वह धर्म की बात करते हैं तो अपने ही लोग उन्हें बुजुर्ग होने, संन्यास लेने की सलाह देने लग जाते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें