दून अस्पताल में भरती नारी निकेतन की पांच संवासिनियों में से एक की हालत गंभीर है, बाकी चार की हालत में कुछ सुधार है। लेकिन वे इतनी सहमी हुई हैं कि लौटकर नारी निकेतन नहीं जाना चाहतीं।
ज्यादातर संवासिनियां मनोरोगी हैं
उनका कहना है कि निकेतन में ज्यादातर संवासिनियां मनोरोगी हैं और उनके शोरगुल से वे परेशान रहती हैं। दून अस्पताल के वार्ड नंबर 17 में मैरीना (30), रेनू (21), हमसोली (45), प्रिया (25) और नीना (20) का इलाज चल रहा है।
पढ़ें, अब इंटरनेट वाउचर की तरह लीजिए टीवी वाउचर भी
डॉ. एसडी जोशी का कहना है कि इनमें दक्षिण भारतीय भी हैं, जिनसे दुभाषिये की मदद से बात की जा रही है। सीएमएस डॉ. आरएस असवाल ने बताया कि एक संवासिनी की हालत गंभीर है, उसे एनीमिया था और खून चढ़ाया जा रहा है।
अधिकारियों ने लापरवाही के सारे रिकॉर्ड तोड़े
संवासिनियों का कहना है कि नारी निकेतन में वे नारकीय जिंदगी जीती हैं। उधर, समाज कल्याण अधिकारियों ने लापरवाही के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
दो संवासिनियों की मौत और पांच के गंभीर होने के बावजूद अब तक कोई अफसर उनका हाल जानने नहीं पहुंचा हे। न ही नारी निकेतन की स्थिति देखी गई है। हालांकि डीएम बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सीडीओ ज्योति नीरज खैरवाल को जांच का आदेश दे दिया है।
पढ़ें, उत्तराखंड में मोदी की 'दीवानी' हुई कांग्रेस
समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार सिंह का कहना है कि वह प्रभारी जरूर हैं, लेकिन कार्यक्रम होने पर ही नारी निकेतन जाते हैं।
मनोरोगियों को क्यों नहीं भेजते अस्पताल
समाज कल्याण विभाग मनोरोगी संवासिनियों को नारी निकेतन में रखकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। निकेतन में उनका इलाज नहीं हो रहा, जबकि व्यवस्था भी खराब हो रही है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार सिंह ने बताया कि 65 संवासिनियां मनोरोगी हैं। सिर्फ दो को सेलाकुई मेंटल हास्पिटल भेजा गया है। वहां स्टाफ कम होने और सिर्फ एक डॉक्टर होने के कारण अस्पताल और संवासिनियों को नहीं ले रहा।
पढ़ें, लोकसभा तक पहुंचने का 'जुगाड़' बने रामदेव
विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रदेश में व्यवस्था न होने पर रोगियों को बरेली, आगरा या दिल्ली के मेंटल हॉस्पिटल भेजा जा सकता है।