राजधानी देहरादून में आधार कार्ड बनाने का काम खिलवाड़ बन गया है। कहीं कैंप नहीं लगे तो कहीं महीनों से प्रगणक नहीं आ रहे हैं।
फॉर्म इधर-उधर फेंककर कर्मचारी गायब
जनसंख्या रजिस्टर में नाम दर्ज करवाने वाले फॉर्म इधर-उधर फेंककर कर्मचारी गायब हैं। पहले हड़ताल के हल्ले में कामकाज ठप था और अब कर्मचारी ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में जिले में आधार कार्ड का काम पिछड़ गया है।
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सदर तहसील में आधार कार्ड बनाने का काम दो महीने से अटका पड़ा है। इसकी वजह है प्रगणक और दूसरे कर्मचारियों का बायोमैट्रिक्स कैंपों में न आना।
इन कर्मचारियों को चेक करना होता है कि जिस शख्स का कार्ड बनाया जाना है वह सही है कि नहीं। बहुत से कर्मचारी हड़ताल के चक्कर में काम अधूरा छोड़कर चले गए थे। हड़ताल खत्म हो गई है लेकिन वे अभी काम पर नहीं लौटे। जाखन क्षेत्र में राजेंद्र सिंह नेगी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए दर्जनों नामांकन फॉर्म आंगनबाड़ी कार्यकत्री कुसुम क्षेत्र के पास छोड़कर आए थे।
लोगों तक नहीं पहुंचे फॉर्म
कैंप की तिथि निकल गई लेकिन फॉर्म अभी तक लोगों तक नहीं पहुंचे। नेगी ने बताया कि जब भी आंगनबाड़ी कार्यकत्री को फोन किया गया तो पता चला कि वह हड़ताल पर है। अब हड़ताल खत्म हो गई तो भी वह फार्म बांटने नहीं आईं। इसी क्षेत्र के वीर गब्बर सिंह बस्ती में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में नाम दर्ज करवाने के लिए फॉर्म बांटा ही नहीं गया।
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अगर इस रजिस्टर में किसी व्यक्ति का नाम नहीं है तो उसका आधार कार्ड नहीं बन पाएगा। ये मामले तो बानगी भर हैं। जिले में आधार कार्ड बनाने का काम बदइंतजामी का शिकार हो गया है।
नगर निगम वार्डों में कैंप नहीं लग पा रहे हैं। लोग इधर-उधर भटक रहे हैं। उन्हें कोई बताने वाला नहीं है कि क्या करें। केंद्र सरकार ने आधार कार्ड बनाने की जिम्मेदारी इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) को सौंपी है।
आधार कार्ड बनाने का काम ईसीआईएल को सौंपा गया है। उनके साथ नगर निगम कोऑर्डिनेट कर रहा है। अगर किसी का फॉर्म जमा नहीं हुआ तो वह कंपनी के दफ्तर से संपर्क कर सकता है।
- झरना कमठान, अपर जिलाधिकारी (वित्त)
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